हम को तो प्यार चाहिए था तेरा प्यार सिर्फ़
इस बात से वफ़ा का कोई वास्ता नहीं
इस बात से वफ़ा का कोई वास्ता नहीं
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मुझे जमाल-तराशी उदास करती है
तो पत्थरों की कहानी उदास करती है
तो पत्थरों की कहानी उदास करती है
हमीं हैं चाँद के दीवाने लोग सो हम को
ये आफ़ताब-परस्ती उदास करती है
कभी कभी सभी त्यौहार याद आते हैं
तेरे बग़ैर ..... कलाई उदास करती है
हसीन ख़्वाब भी कुछ को नसीब होते हैं
किसी किसी को उदासी उदास करती है
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ता'लीम पुरखों की भी ज़बानी में देखिए
या'नी किसी किताब पुरानी में देखिए
या'नी किसी किताब पुरानी में देखिए
संसार को समझ सके सबकी निगाह से
किरदार इस तरह का कहानी में देखिए
हम से ने पूछिए की रवाँ क्यूँ हैं इश्क़ में
में'यार राब्ते का दिवानी में देखिए
कुछ ख़्वाब पूरे होते ही हसरत भी मिट गई
कुछ ख़्वाब रह गए तो निशानी में देखिए
कश्ती ही बस नहीं मेरी महरूमी की वजह
ख़ामी कभी कभी तो रवानी में देखिए
अपना मक़ाम है यहाँ हर एक से जुदा
शीशे को छोड़ दीजिए पानी में देखिए
ये चश्म-ए-आब-दार नहीं-क़ाबिल-ए-यक़ीं
शब्दों के ए'तिबार मआ'नी में देखिए
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आदत कि पहरों चाँद-सितारों को देखना
इक दिन ज़मीं से दूर करेगी हमें-तुम्हें
इक दिन ज़मीं से दूर करेगी हमें-तुम्हें
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अपना मक़ाम है यहाँ हर एक से जुदा
शीशे को छोड़ दीजिए पानी में देखिए
शीशे को छोड़ दीजिए पानी में देखिए
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मौसम तो और भी हैं तेरी यादों के मगर
दुख के उरूज पर यूँ ही मोती रहेगी शाम
दुख के उरूज पर यूँ ही मोती रहेगी शाम
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