हर क़दम इक नए अंधेरे से
लड़ना पड़ता है रौशनी को यहाँ
सिर्फ़ काँटे हुए किसी का नसीब
और गुलशन मिला किसी को यहाँ
हर घड़ी मौत मौत कर के सब
रौंद देते हैं ज़िंदगी को यहाँ
अपनी आवाज़ में ही गुम हैं सभी
कौन सुनता है ख़ामोशी को यहाँ
दिल में कुछ है ज़बान पर कुछ है
कैसे पहचानें आदमी को यहाँ
भूल कुछ हो गई अनन्या से
सच समझ बैठी दिल-लगी को यहाँ
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दिल किसी से भी अगर लगता है
फिर तो दीवार से सर लगता है
फिर तो दीवार से सर लगता है
एक बस तुम को ही चाहूँ लेकिन
मुझ को इस इश्क़ से डर लगता है
तेरी यादों से सजाती हूँ जब
मुस्कुराता हुआ घर लगता है
हम सेफ़र तू जो नहीं है मेरा
रूठा रूठा सा सफ़र लगता है
मीठे मीठे से ख़याल आते हैं
तेरी बातों का असर लगता है
अब नहीं है वो 'अनन्या' तेरा
सच नहीं है ये मगर लगता है
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"ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है"
ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
दिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है
जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है
हँसी ठिठोली और आँसू है फिर दर्दों का सार लिखा है
नाम तुम्हारा हर पन्ने पर जाने कितनी बार लिखा है
हम ने अपनी हार लिखी है और तुम्हारी जीत लिखा है
ये ना पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
तुलसी की पाती पर मैं ने दिल के सब मनुहार लिखा है
प्यार हमारा अमर रहे ये क्या क्या है स्वीकार लिखा है
इन अधरों से उन अधरों का जो भी है संवाद लिखा है
अपने दिल के इन भावों का एक सरल अनुवाद लिखा है
ये रिश्ता है अपना कितना पावन और पुनीत लिखा है
ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
Read Fullदिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है
जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है
हँसी ठिठोली और आँसू है फिर दर्दों का सार लिखा है
नाम तुम्हारा हर पन्ने पर जाने कितनी बार लिखा है
हम ने अपनी हार लिखी है और तुम्हारी जीत लिखा है
ये ना पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
तुलसी की पाती पर मैं ने दिल के सब मनुहार लिखा है
प्यार हमारा अमर रहे ये क्या क्या है स्वीकार लिखा है
इन अधरों से उन अधरों का जो भी है संवाद लिखा है
अपने दिल के इन भावों का एक सरल अनुवाद लिखा है
ये रिश्ता है अपना कितना पावन और पुनीत लिखा है
ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
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उस ने जब भी कभी मोहब्बत की
जैसे मुझ पे कोई इनायत की
जैसे मुझ पे कोई इनायत की
डूब जाते हैं अहल-ए-दिल इस
में
मैं वही झील हूँ मोहब्बत की
फिर मेरे रू-ब-रू वो आया है
फिर ख़बर हो गई क़यामत की
होंठ पर होंठ रख दिए मैं ने
क्या ज़रूरत है अब इजाज़त की
जब तेरा लम्स हो गया हासिल
किस को परवाह कोई जन्नत की
ऐसे मंज़िल नहीं मिली मुझ को
मैं ने पाने को ख़ूब मेहनत की
ग़मज़दों ने सजाई थी महफ़िल
और मैं ने वहाँ निज़ामत की
आज़माओ ना तुम 'अनन्या' को
हद होती है इक शराफ़त की
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बताओ बताओ कहाँ जा रहे हो
न हम को सताओ कहाँ जा रहे हो
न हम को सताओ कहाँ जा रहे हो
ज़रा देर ठहरो करो बात मुझ से
नज़र मत चुराओ कहाँ जा रहे हो
जो रक्खा है तुम ने मेरी रहगुज़र पर
वो पत्थर हटाओ कहाँ जा रहे हो
बड़े दिन पे मिलना हुआ है हमारा
तबीयत सुनाओ कहाँ जा रहे हो
यहाँ हम सफ़र से ज़रूरी है क़ुरबत
ये दूरी मिटाओ कहाँ जा रहे हो
ऐ साक़ी कभी तो वो जाम-ए-इनायत
हमें भी पिलाओ कहाँ जा रहे हो
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