sahil

Top 10 of sahil

    हादिसा है चराग़ बुझने पर
    रात मातम नहीं मनाती है
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    उधर पाने की चाहत है इधर है लुत्फ़ खोने का
    उधर इश्क़-ए-मजाज़ी है इधर इश्क़-ए-हक़ीक़ी है
    sahil
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    बराबर तंज कसती थीं हवाएँ
    दिया जलता रहा बस मुस्कुरा कर
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    हैं दाग़ के आँगन में भी चर्चे तुम्हारे हुस्न के
    ख़ूँ थूकता मेरा हवाला जौन के मिसरे में है
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    हमीं थे वहाँ जब मकाँ जल रहे थे
    हमें मत बताओ किधर की हवा थी
    sahil
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    ये दामन अश्क़ से गीला नहीं है
    अभी दिल से लहू फूटा नहीं है

    नया इक दर्द दस्तक दे रहा है
    पुराना ज़ख़्म भी सूखा नहीं है

    मिरी धड़कन तलक पर वो है क़ाबिज़
    मगर उस में मिरा हिस्सा नहीं है

    गिला ये है मुझे उस नाख़ुदा से
    वो मुझ सा है मगर मेरा नहीं है

    यहाँ पर सिर्फ़ काँटे ही मिलेंगे
    मुहब्बत ताज फूलों का नहीं है

    गुनाहों से अभी वाबस्तगी है
    पुराने पेड़ को काटा नहीं है

    अभी भी लड़ रहा है जंग साहिल
    दिया तूफ़ाँ से ये हारा नहीं है
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    sahil
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    जुदाई मौत सी लगती है जिन को
    उन्होंने भूख देखी ही नहीं है
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    मैंने तुझ को कहा था मिसरे में
    और वो शेर हो गया जानाँ
    sahil
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    ये ऐब है या है सिफ़त ये मौत का फ़रमान है
    तुम इश्क़ कहते हो जिसे अंजान सा तूफ़ान है
    sahil
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    इशारा है सियासत पर अभी बातें नहीं करनी
    अगर हम भी रहे ख़ामोश तो क्या मुल्क का होगा
    sahil
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