ye daaman ashk se geela nahin hai | ये दामन अश्क़ से गीला नहीं है

  - sahil

ये दामन अश्क़ से गीला नहीं है
अभी दिल से लहू फूटा नहीं है

नया इक दर्द दस्तक दे रहा है
पुराना ज़ख़्म भी सूखा नहीं है

मिरी धड़कन तलक पर वो है क़ाबिज़
मगर उस में मिरा हिस्सा नहीं है

गिला ये है मुझे उस नाख़ुदास
वो मुझ सा है मगर मेरा नहीं है

यहाँ पर सिर्फ़ काँटे ही मिलेंगे
मुहब्बत ताज फूलों का नहीं है

गुनाहों से अभी वाबस्तगी है
पुराने पेड़ को काटा नहीं है

अभी भी लड़ रहा है जंग साहिल
दिया तूफ़ाँ से ये हारा नहीं है

  - sahil

Shikwa Shayari

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