Ananya Rai Parashar

Ananya Rai Parashar

@ananyaraiparashar

Ananya Rai Parashar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ananya Rai Parashar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

ये जो हम तेरी राह देखते हैं ख़ुद के मिटने की चाह देखते हैं — Ananya Rai Parashar
रोज़ वही इक मायूसी मारे जाती है रोज़ वही इक ज़िंदा रहने के ता'ने हैं — Ananya Rai Parashar
कौन ढूंँढे मुझे है फिक्र किसे मेरा गुम रहना कितना अच्छा है — Ananya Rai Parashar
तुम मुझे इतना आम मत समझो हर किसी के लिए नहीं हूँ मैं — Ananya Rai Parashar
मेरी निगाह में अक्सर जो तुम सेे बनता है बहुत हसीं है वो मंज़र जो तुम सेे बनता है — Ananya Rai Parashar
सोचती हूँ कि गुम हो जाऊँ कहीं और फिर तुम मुझे तलाश करो — Ananya Rai Parashar
ग़म में अपने कमी तो होती कभी ज़िंदगी ज़िंदगी तो होती कभी — Ananya Rai Parashar
मिल के भी फ़ासले ही रहते हैं वो कहीं होता है मैं और कहीं — Ananya Rai Parashar
किसी की कट रही है बस ग़मों में किसी की ज़िंदगी कितनी हसीं है — Ananya Rai Parashar
ख़ुद को इतना न परेशाँ रखिए मुस्कुराने पे भी रोना आए — Ananya Rai Parashar
यूँँ किसी की अता नहीं है ये अपनी हस्ती बनाई है मैं ने — Ananya Rai Parashar
क्यूँ परेशां हों किसी बात से हम कुछ ना रहता है हमेशा के लिए — Ananya Rai Parashar
सजाए रखना है इस को तो आख़िरी दम तक मैं अपने बाग़ के फूलों में देखती हूँ तुम्हें — Ananya Rai Parashar
दिल मसर्रत से भर नहीं आता जब मुझे वो नज़र नहीं आता — Ananya Rai Parashar
लगाके लब से अपने जाम भेजो तड़पते दिल को कुछ आराम भेजो — Ananya Rai Parashar
इल्म इतना तो मुझे हासिल है बे-सबब कोई बहस अच्छी नहीं — Ananya Rai Parashar

Ghazal

टूट जाता है सिलसिला कैसा उस का मुझ सेे है राबता कैसा अब कहाँ फ़िक्र किस को दुनिया में शक़्ल है कैसी आईना कैसा है इधर हिज्र और उधर है वस्ल हो गया मुझ पे हादसा कैसा ऐश ही ऐश है तुम्हारी अब जब नहीं मैं तो मसअला कैसा जिस की मंज़िल नहीं हो तुम जानाँ रास्ता है वो रास्ता कैसा इतनी ख़ामोशी इतनी वीरानी? कौन बतलाए शोर था कैसा तुम को मेहनत से वास्ता ही नहीं अपनी क़िस्मत से आसरा कैसा देखो सिंदूर माँग में मेरी मैं ने रक्खा है आसरा कैसा दर्द जब शे'र में नहीं आए क्या रदीफ़ इस की क़ाफ़िया कैसा लोग खोये हुए हैं सेहरा में ये ज़माना भी हो गया कैसा एक क़श्ती और आग का दरिया रात देखा जो ख़्वाब था कैसा शा'इरी का सुरूर छाया रहा दिन भी गुज़रा है आज का कैसा तुम वहाँ, मैं यहाँ वो और कहीँ उफ़्फ़ ये आख़िर है मामला कैसा एक लम्हें में टूटे सारे क़सम तुम ये तो कह दो साथ था कैसा कोई आता है पर वो दिखता नहीं साथ मेरे ये वसवसा कैसा जब न लड़के का दायरा कुछ भी एक लड़की का दायरा कैसा मैं हूँ मासूम और सज़ा भी मुझे तेरा मुंसिफ़ ये फ़ैसला कैसा रूह से रूह का है रिश्ता जब फिर शिकायत में फ़ासला कैसा जान ले जाता है ये काफ़ी नहीं ज़हर का यार ज़ाइक़ा कैसा गुल नहीं तितलियां नहीं भँवरे नहीं फिर ये मौसम भी ख़ुशनुमा कैसा तुम 'अनन्या' न सब सेे दिल से मिलो दे रहें लोग मशवरा कैसा — Ananya Rai Parashar

Nazm

"ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है" ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है दिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है हँसी ठिठोली और आँसू है फिर दर्दों का सार लिखा है नाम तुम्हारा हर पन्ने पर जाने कितनी बार लिखा है हम ने अपनी हार लिखी है और तुम्हारी जीत लिखा है ये ना पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है तुलसी की पाती पर मैं ने दिल के सब मनुहार लिखा है प्यार हमारा अमर रहे ये क्या क्या है स्वीकार लिखा है इन अधरों से उन अधरों का जो भी है संवाद लिखा है अपने दिल के इन भावों का एक सरल अनुवाद लिखा है ये रिश्ता है अपना कितना पावन और पुनीत लिखा है ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है — Ananya Rai Parashar
"तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है" ज़िंदा हूँ पर जान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है लम्हा लम्हा तन्हाई है बे-ताबी है रुसवाई है और जो ग़म की ये खाई है तेरी मोहब्बत में पाई है साँसों का एहसान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है हँसती है कब याद तुम्हारी डसती है अब याद तुम्हारी जलती है सब याद तुम्हारी मुझ में हर शब याद तुम्हारी मुश्किल है आसान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है बरखा सावन हार गई मैं जो था पावन हार गई मैं सब तन मन धन हार गई मैं या'नी जीवन हार गई मैं चैन का भी उनवान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है जाम में जब हम भर जाएँगे नाम तेरे वो कर जाएँगे थक के फिर हम घर जाएँगे इश्क़ में इक दिन मर जाएँगे तेरे सिवा ईमान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है — Ananya Rai Parashar
"गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ" गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ तू जो है पास तो उजाला है वरना जीवन में बस अँधेरा है तेरे आने की जब ख़बर पाऊँ फूल से राह फिर सजाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ मेरे दिन रैन भी नहीं तुझ बिन एक ज़रा चैन भी नहीं तुझ बिन तू नज़र जब कहीं नहीं आता आँसू आँखों से बहाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ कितनी क़ातिल है दिल की तन्हाई जैसे धड़कन नहीं है, रूसवाई फिर कहीं लौट कर नहीं जाती तेरी आवाज़ पे जब आती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ क़ैद कर लो तुम अपनी बाहों में एक बस मैं रहूँ निगाहों में मुझ सेा जोगन नहीं तू पाएगा नाम का गीत तेरे गाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ सुब्ह हो जाऊँ रात हो जाऊँ इस तरह तेरे साथ हो जाऊँ तेरी तस्वीर बेक़रारी में अपने सीने से मैं लगाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ मुझ सेा पागल कहाँ मिलेगा तुम्हें रश्म सब इश्क़ के निभाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ — Ananya Rai Parashar
"भारत माँ के वीर" हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम चट्टानों से डट के अड़े हैं माँ के वीर सरहद पे तैयार खड़े हैं माँ के वीर इस मिट्टी के कण कण में है तेरा नाम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम सारी कली का बाग़ यहीं है दुनिया में देश हमारा सब सेे हसीं है दुनिया में देश ये अपना ईश्वर का है इक इनआ'म हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम मीठी मीठी बोली में है देश का हुस्न रंगो की रंगोली में है देश का हुस्न इस की छाया में ही मिलता है आराम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम संदल की ख़ुशबू वतन का वातावरण गंगा जी से शुद्ध हुआ हर अंतःकरण चारो दिशाओं में है यहाँ पाकीज़ा मक़ाम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम — Ananya Rai Parashar