ग़म भुलाने की बात क्यूँ न करें
मुस्कुराने की बात क्यूँ न करें
अपनी तहज़ीब है रिवायत है
हम ज़माने की बात क्यूँ न करें
क्या ये शिकवे ज़बाँ पे रखते हैं
दिल चुराने की बात क्यूँ न करें
बैठ कर साथ हम बुजुर्गों के
घर घराने की बात क्यूँ न करें
वो जो मरता है मेरी बातों पे
उस दीवाने की बात क्यूँ न करें
बात क्यूँ कर हो आंधियों की भला
आशियाने की बात क्यूँ न करें
इतनी ख़ामोशियां भी अच्छी नहीं
गुनगुनाने की बात क्यूँ न करें
— Ananya Rai Parashar















