khada hoon aaj bhi roti ke chaar harf liye | खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए

  - Nazeer Baaqri

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को

  - Nazeer Baaqri

Gareebi Shayari

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    सच की डगर पे जब भी रक्खे क़दम किसी ने
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