गुनगुनाती हूँ मैं इतराती हूँ
उस को देखूँ तो मैं खिल जाती हूँ
मैं दीवानी नहीं पागल भी नहीं
पर तुझे देख के शर्माती हूँ
एक बस तेरी मुहब्बत के लिए
सारी दुनिया से मैं लड़ जाती हूँ
बे-ज़बानों को ज़बाँ दी मैं ने
फिर भी मैं ख़ामोशी कहलाती हूँ
मुस्कुराती हैं चमन में कोयल
गीत जब इश्क़ के मैं गाती हूँ
— Ananya Rai Parashar















