जाओ के बार बार नहीं एक बार आए
लेकिन तुम्हारे होश को मेरा ख़ुमार आए
अश'आर अपने लब पे सजा लो कभी जो तुम
फिर बे-क़रार मेरी ग़ज़ल को क़रार आए
यादों में तेरी डूबती रहती हूँ मैं सदा
बेचैन दिल को मेरे तुझी से क़रार आए
देखूँ मैं आइने में सनम जब भी तेरा अक़्स
आँखों में नूर चेहरे पे पल पल निखार आए
बुझती हुई हयात की ख़्वाहिश है आख़िरी
अब वो ही आए पास न ये इंतिज़ार आए
ऐलान है 'अनन्या' का सुन लो तुम्हारे बा'द
देखा कहीं नहीं कोई जिस पे की प्यार आए
— Ananya Rai Parashar















