ham to kuchh der hans bhi lete hain | हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं

  - Bashir Badr

हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं
दिल हमेशा उदास रहता है

  - Bashir Badr

Bekhayali Shayari

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    जैसे उदास करने मुझे आई ईद हो
    तेरे बगैर कैसी मिरी, माई ईद हो
    Sayeed Khan
    गए ज़माने की चाप जिन को समझ रहे हो
    वो आने वाले उदास लम्हों की सिसकियाँ हैं
    Aanis Moin
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    ईद ख़ुशियों का दिन सही लेकिन
    इक उदासी भी साथ लाती है

    ज़ख़्म उभरते हैं जाने कब कब के
    जाने किस किस की याद आती है
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    Farhat Ehsaas
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    किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे
    हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
    Sawan Shukla
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    हाथ पकड़कर वापस लायी है तन्हाई

    वस्ल दिनों को काफ़ी छोटा कर देता है
    हिज्र बढ़ा देता है रातों की लम्बाई
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    Tanoj Dadhich
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    मज़ा चहिए जो आख़िर तक उदासी से मोहब्बत कर
    ख़ुशी का क्या है कब तब्दील है से थी में हो जाए
    Atul K Rai
    गर कोई मुझसे आकर कहता, यार उदासी है
    मैं उसको गले लगाकर कहता, यार उदासी है

    होता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरी
    गलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है
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    Siddharth Saaz
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    उम्र भर मेरी उदासी के लिए काफ़ी है
    जो सबब मेरी ख़मोशी के लिए काफ़ी है

    जान दे देंगे अगर आप कहेंगे हमसे
    जान देना ही मुआफ़ी के लिए काफ़ी है
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    Aakash Giri
    उदासी इक समंदर है कि जिसकी तह नहीं है
    मैं नीचे और नीचे और नीचे जा रहा हूँ
    Charagh Sharma
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    हर कोई इश्क़ का मारा हो, ज़रूरी तो नहीं
    Jaani Lakhnavi
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    अब किसे चाहें किसे ढूँडा करें
    वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें

    हल्की हल्की बारिशें होती रहीं
    हम भी फूलों की तरह भीगा करें

    आँख मूँदे उस गुलाबी धूप में
    देर तक बैठे उसे सोचा करें

    दिल मोहब्बत दीन दुनिया शाइ'री
    हर दरीचे से तुझे देखा करें

    घर नया कपड़े नए बर्तन नए
    इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें
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    Bashir Badr
    जब तक निगार-ए-दश्त का सीना दुखा न था
    सहरा में कोई लाला-ए-सहरा खिला न था

    दो झीलें उस की आँखों में लहरा के सो गईं
    उस वक़्त मेरी उम्र का दरिया चढ़ा न था

    जागी न थीं नसों में तमन्ना की नागिनें
    उस गंदुमी शराब को जब तक चखा न था

    ढूँडा करो जहान-ए-तहय्युर में उम्र भर
    वो चलती फिरती छाँव है मैं ने कहा न था

    इक बेवफ़ा के सामने आँसू बहाते हम
    इतना हमारी आँख का पानी मरा न था

    वो काले होंट जाम समझ कर चढ़ा गए
    वो आब जिस से मैं ने वुज़ू तक किया न था

    सब लोग अपने अपने ख़ुदाओं को लाए थे
    एक हम ऐसे थे कि हमारा ख़ुदा न था

    वो काली आँखें शहर में मशहूर थीं बहुत
    तब उन पे मोटे शीशों का चश्मा चढ़ा न था

    मैं साहिब-ए-ग़ज़ल था हसीनों की बज़्म में
    सर पर घनेरे बाल थे माथा खुला न था
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    Bashir Badr
    जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है
    यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है

    लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए
    यूँ याद तिरी शब भर सीने में सुलगती है

    यूँ प्यार नहीं छुपता पलकों के झुकाने से
    आँखों के लिफ़ाफ़ों में तहरीर चमकती है

    ख़ुश-रंग परिंदों के लौट आने के दिन आए
    बिछड़े हुए मिलते हैं जब बर्फ़ पिघलती है

    शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
    जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
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    Bashir Badr
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    ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
    रहे सामने और दिखाई न दे
    Bashir Badr
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    ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत
    घर से निकलो तो ये दुनिया ख़ूबसूरत है बहुत

    अपने कॉलेज में बहुत मग़रूर जो मशहूर है
    दिल मिरा कहता है उस लड़की में चाहत है बहुत

    उन के चेहरे चाँद तारों की तरह रौशन रहे
    जिन ग़रीबों के यहाँ हुस्न-ए-क़नाअत है बहुत

    हम से हो सकती नहीं दुनिया की दुनिया-दारियाँ
    इश्क़ की दीवार के साए में राहत है बहुत

    धूप की चादर मिरे सूरज से कहना भेज दे
    ग़ुर्बतों का दौर है जाड़ों की शिद्दत है बहुत

    इन अँधेरों में जहाँ सहमी हुई थी ये ज़मीं
    रात से तन्हा लड़ा जुगनू में हिम्मत है बहुत
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    Bashir Badr

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