मुश्किलों की शिफ़ा हो जाएँगे
हम मरज़ की दवा हो जाएँगे
उस के चेहरे की बात क्या लिक्खें
लिखते-लिखते फ़ना हो जाएँगे
हम ने सोचा न था मोहब्बत में
क्या से हम जाने क्या हो जाएँगे
ज़िंदगी को निभाएँगे इतना
ज़िंदगी की दुआ हो जाएँगे
गर मैं कोई चराग़ बन जाऊँ
दुनिया वाले हवा हो जाएँगे
इक ना इक रोज़ तोड़कर ज़िंदान
सब परिंदे रिहा हो जाएँगे
साफ़ सादा वजूद है अपना
हम भी इक आइना हो जाएँगे
इब्तिदा इश्क़ में है ऐसी मेरी
एक दिन इंतिहा हो जाएँगे
ऐसे देखो न तुम 'अनन्या' को
वरना हम अपसरा हो जाएँगे
— Ananya Rai Parashar















