Jaffer Imam

Top 10 of Jaffer Imam

    जहाँ इम्कान के रस्ते मिलेंगे
    वहाँ हम लोग पहले से मिलेंगे

    बशारत दी है उस ने जाते-जाते
    कहीं हम नज़्म से आगे मिलेंगे

    अदाकारी करो मायूस लड़के
    वहाँ रोने के भी पैसे मिलेंगे

    ये जीना-मरना पहला मरहला था
    अभी कुछ और भी ख़तरे मिलेंगे

    एक अरसे साथ रहने का ख़सारा
    हमारे बच्चों के चेहरे मिलेंगे

    वो इक पल के लिए आएगा उस के
    कई दिन बा'द तक चर्चे मिलेंगे

    रखी हैं जिन के बस्तों में गुलेलें
    उन्हीं बस्तों में कल कट्टे मिलेंगे

    पुराना-सा वही बेकार जुमला
    तिरे जैसे बहुत लड़के मिलेंगे
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    Jaffer Imam
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    जो मिला उस से एहतिजाज किया
    मैं ने ज़ख़्मों का यूँ इलाज किया
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    दोस्त मालूम था इक दिन तू पराई होगी
    पर ये सोचा न था इस तरह जुदाई होगी

    क्या हुआ होगा तेरे जाने से ये याद नहीं
    इतना तय है कि मेरी आँख भर आई होगी

    आसमानों में बने जोड़े बिछड़ जाएँगे
    ज़ख़्म खाए हुए लोगों की सगाई होगी

    रेगज़ारों पे कई चाँद चमकते होंगे
    शब में सरदार ने जब शमअ बुझाई होगी

    मेरी बे-वक़्त तरक़्क़ी से मेरे अपनों के
    दिल में अफ़सोस मगर लब पे बधाई होगी

    ज़िंदगी अपनी चमकदार बनाने के लिए
    आज से रोज़ मुक़द्दर की घिसाई होगी
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    Jaffer Imam
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    करोड़ों लोग जितना सोचते हैं
    तुझे हम उतना तन्हा सोचते हैं

    ग़रीबों का अलग मस्लक है साहब
    ये हर भूखे को अपना सोचते हैं

    तुम उन से पूछना मौक़ा मिले तो
    हमारे बारे में क्या सोचते हैं

    उसे ना बोलना आता नहीं था
    वो कह देती थी अच्छा सोचते हैं

    हर इक झगड़े की जड़ ये मसअला है
    कि हम सब ख़ुद को अच्छा सोचते हैं

    तो फिर ये रिश्वतें लेनी पड़ेंगी
    अगर हम अपने घर का सोचते हैं

    तुम उन की बात में मत आओ लड़की
    वो सब को अपने जैसा सोचते हैं

    असल में मौत है आग़ाज़ अपना
    मगर हम लोग उल्टा सोचते हैं

    निकल आए हैं हम रोज़-ए-जज़ा से
    चलो अब अपना-अपना सोचते हैं
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    Jaffer Imam
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    चलते-चलते इक दिन रस्ता मोड़ दिया
    मैं ने अपना पीछा करना छोड़ दिया

    सारी अस्बूनात जलाकर माज़ी की
    ख़ुद को मैं ने मुस्तक़बिल से जोड़ दिया

    बापू तेरे पैर को जिस ने कुचला था
    मैं ने उस गाड़ी का शीशा फोड़ दिया

    जिस ने अपना असली चेहरा देख लिया
    उस ने वहशत में आईना तोड़ दिया

    यूँ ही कोई जाली आयत रटवाकर
    इक टूटे इंसान को मैं ने जोड़ दिया

    एक इंसान के धोखा देने से जाफ़र
    तुम ने मस्जिद आना-जाना छोड़ दिया
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    Jaffer Imam
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    ख़ंजर वही है ख़ूॅं का तलबगार नया है
    सब ज़ुल्म पुराने हैं बस अख़बार नया है

    हर रोज़ नया रंग दिखाता है वो अपना
    वो शख़्स मेरे साथ लगातार नया है

    तालाब में कुछ रोज़ से लाशें नहीं आईं
    लगता है कि गाँव का ज़मींदार नया है

    हम लोग मुहाज़िर हैं जिन्हें कोई न जाने
    हर दूसरी बरसात में घर-बार नया है

    तुम को अभी हर बात मेरी अच्छी लगेगी
    कुछ रोज़ गुज़रने दो अभी प्यार नया है

    मालूम है ये शख़्स भी मेरा नहीं होगा
    नाटक तो पुराना है कलाकार नया है
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    Jaffer Imam
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    मैदान से हटने का इरादा नहीं करता
    लश्कर तिरे होते हुए ऐसा नहीं करता

    तुम ने ही उसे लाएक़-ए-सजदा नहीं माना
    वरना वो इबादत का तक़ाज़ा नहीं करता

    बिखरा के चला जाता है जज़्बात वो मेरे
    जब लौट के आए तो इकट्ठा नहीं करता

    अंदर जो जनाज़ा है दिखाना पड़ा इक दिन
    लफ़्ज़ों से बताता तो भरोसा नहीं करता

    वो फोन पे हर बात बता देता है मुझ को
    पर सामने आए तो इशारा नहीं करता

    चेहरे की तजल्ली मिरी इस आँख में ज़म है
    बाला-ए-बनफ़्शी मुझे अंधा नहीं करता
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    Jaffer Imam
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    तीरगी का न उजालों का अज़ाख़ाना है
    दिल मिरा बीते ज़मानों का अज़ाख़ाना है

    किस ने सोचा था हमें साॅंस की क़िल्लत होगी
    मुल्क अब दर्द के मारों का अज़ाख़ाना है

    टूट के आते हैं इस सिम्त ही गिरने वाले
    ये ज़मीं या'नी सितारों का अज़ाख़ाना है
    सठ के घर में हैं गिरवी के बहुत से ज़ेवर
    ये तिजोरी तो ख़ज़ानों का अज़ाख़ाना है

    बैठके रोते हैं वो अपनी बुझी क़िस्मत पर
    चाँदनी रात चराग़ों का अज़ाख़ाना है

    उनपे रोता हूँ मैं जिनपे नहीं रोता कोई
    चश्म-ए-नाचीज़ हज़ारों का अज़ाख़ाना है

    ग़म पलटने के लिए जॉन को पढ़ लेते हैं
    शा'इरी उन की जवानों का अज़ाख़ाना है

    जिन के रोने से लरज़ जाते हैं दोनों आलम
    कर्बला ऐसे घरानों का अज़ाख़ाना है
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    Jaffer Imam
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    हर एक बात पे बस आस्तीं चढ़ानी है
    यही तो हज़रत-ए-इंसान की कहानी है

    ये इन्क़लाब के नारे तो ठीक हैं लेकिन
    वो क्या करे कि जिसे नौकरी बचानी है

    कहीं-कहीं पे मोहब्बत का मीम काफ़ी है
    कहीं-कहीं पे तो तशदीद भी लगानी है

    वफ़ा निभाते हो या'नी ये इस से ज़ाहिर है
    तुम्हारे हाथ में अंगुश्तरी पुरानी है

    ख़ुदा के नाम पे ये लूटने को आए हैं
    जगह बताओ मुझे ज़िंदगी छुपानी है

    ये कर्बला ही हमारी नजात है जाफ़र
    बला-ओ-कर्ब से वाबस्तगी पुरानी है
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    Jaffer Imam
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    बिना पर का परिंदा कर रहे हैं
    मुझे ये ख़्वाब अंधे कर रहे हैं

    बिठाकर हर दफ़ा पिछली सफ़ों में
    मुझे ये लोग ज़ाया' कर रहे हैं

    फ़क़त कुछ झूठे वादे ख़र्च कर के
    बहुत से दिल का धंधा कर रहे हैं

    सभी ने एक अफ़साना पढ़ा है
    तेरी जो जो तमन्ना कर रहे हैं

    लगाऍंगे दवा जल्दी भी क्या है
    अभी तो ज़ख़्म गहरा कर रहे हैं

    ख़ुदा उन के भी कपड़े साफ़ रक्खे
    मेरा दामन जो मैला कर रहे हैं

    अभी एक नूर उतरेगा यहाँ पर
    अभी सरवर अँधेरा कर रहे हैं

    मोहब्बत करने की हिम्मत नहीं है
    मगर हम इस्तिख़ारा कर रहे हैं

    किए थे हम ने तुम से जितने वादे
    वो सब तोड़ेंगे वा'दा कर रहे हैं

    हिफ़ाज़त के लिए रहते हैं पीछे
    उसे लगता है पीछा कर रहे हैं

    नहीं है कारख़ाने में कोई ग़म
    मगर हम शे'र पैदा कर रहे हैं

    वहाँ ऊँचाई पे सब बँट चुका है
    ज़मीं पे लोग झगड़ा कर रहे हैं

    छुपा रक्खा है दिल में नाम उस का
    मोहब्बत में तक़य्या कर रहे हैं
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    Jaffer Imam
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