Meaning of

तरक़्क़ी

taraqqi • ترقی

प्रगति; उन्नति; विकास

progress; advancement; development

ترقی; پیشرفت; ارتقاء

Arabic

अब ज़रूरत पड़ने पर कुछ यूँँ बदल जाते हैं अपने
जंग में आगे खड़ा कर के निकल जाते हैं अपने

जब तरक़्क़ी देखते हैं अपनों की तब सब सेे पहले
उन के आगे मोम के जैसे पिघल जाते हैं अपने

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फूल छत पे खिल गए पर ताज़गी खोते गए
हम बहुत कर के तरक़्क़ी सादगी खोते गए

था पिता पर बोझ तो हम दिल-लगी में चूर थे
बोझ जब ख़ुद पर पड़ा तो दिल-लगी खोते गए

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तरक़्क़ियों का फ़साना सुना दिया मुझ को
अभी हँसा भी न था और रुला दिया मुझ को

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को

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दोस्त-दुश्मन आजकल 'अय्यार होना चाहिए
यार आशिक़ भी तिरा ख़ुद्दार होना चाहिए

नौकरी में हो तरक़्क़ी और क्या ही चाहिए
ज़िंदगी के कष्ट का व्यापार होना चाहिए

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देखते ही देखते मौसम बदलने लग गया
आँख के तारे की आँखों में मैं खलने लग गया

जो तरक़्क़ी की दुआ करता था मेरी हाँ वही
देख कर मेरी तरक़्क़ी मुझ सेे जलने लग गया

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अब जा के मुल्क आया तरक़्क़ी की राह पर
करते थे जो हुकूमत हुकूमत के दिन गए

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बदल कर सितम-गर तरक़्क़ी हुई और
बहुत कुछ हुआ पाँच सालों के अंदर

दफ़्न कर दिए है सभी राज़ ख़ुद के
किताबों में मेरी सवालों के अंदर

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सियासत के फ़क़त परचम उठाए दोड़ते रहना
तरक्की के हमेशा रास्ते तुम छोड़ते रहना

सियासत दाँ ये घू
मेंगे बड़ी उस रेंज रोवर में
इन्हीं के हाथ हरदम पाँव तुम बस जोड़ते रहना

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अब तरक़्क़ी के लिए ही भागना है
महज़ काँटों से न रस्ता ही बना है

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उन दिनों इतनी तरक्की तो नहीं थी 'आक़िब'
हाँ मगर लोग मददगार हुआ करते थे

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अब ज़रूरत पड़ने पर कुछ यूँँ बदल जाते हैं अपने
जंग में आगे खड़ा कर के निकल जाते हैं अपने

जब तरक़्क़ी देखते हैं अपनों की तब सब सेे पहले
उन के आगे मोम के जैसे पिघल जाते हैं अपने

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फूल छत पे खिल गए पर ताज़गी खोते गए
हम बहुत कर के तरक़्क़ी सादगी खोते गए

था पिता पर बोझ तो हम दिल-लगी में चूर थे
बोझ जब ख़ुद पर पड़ा तो दिल-लगी खोते गए

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मूल रूप से 'तरक़्क़ी' का अर्थ है आगे बढ़ना या विकास, जो अक्सर समाज या व्यक्तिगत उन्नति से जुड़ा होता है। कविता में, यह मानव आत्मा की आकांक्षाओं और संघर्षों को दर्शाता है, जो एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने के सार को पकड़ता है।

'तरक़्क़ी' का उपयोग कवि अक्सर आशा और महत्वाकांक्षा के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह एक राष्ट्र की यात्रा या आत्म-सुधार की खोज को दर्शा सकता है। यह ठहराव के विपरीत जीवन की गतिशील प्रकृति को उजागर करता है।

कविता में, 'तरक़्क़ी' एक प्रकाशस्तंभ बन जाता है, जो आत्मा को अनिश्चितता के अंधकार से मार्गदर्शन करता है।