वालिद को खोने के बा'द हुआ एहसास मुझे
बिन सूरज के इस दिन की कोई औक़ात नहीं
बिन सूरज के इस दिन की कोई औक़ात नहीं
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कि इतनी मेहरबानी बस ख़ुदा कर दे
अमीरों को तू बस इक दिल अता कर दे
अमीरों को तू बस इक दिल अता कर दे
ग़रीबों को निवाला नइँ दे सकता गर
तो दे कर मौत तू उन का भला कर दे
लहू से शहर लतपथ देखे नइँ जाते
मुहब्बत शहर में मौला अता कर दे
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ग़रीबी है वहाँ पे सो वहाँ नफ़रत नहीं बिकती
हमारे गाँव में सब खेलतें हैं मिट्टी से होली
हमारे गाँव में सब खेलतें हैं मिट्टी से होली
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