ज़िंदगी अब कुछ और नहीं दरकार
मुझे अच्छी भली उदासी है
मुझे अच्छी भली उदासी है
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है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा
कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन
कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन
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इस का मतलब कि ज़िन्दगी दुख है
सब यही कहते हैं अजी दुख है
सब यही कहते हैं अजी दुख है
इस नई नस्ल के हैं ढ़ेरों दुख
पहला दुख वक़्त की कमी दुख है
और सुनाओ कि कैसी कट रही है
और तो क्या है बस वही दुख है
मुझे मेरा मिज़ाज ले डूबा
इस ज़माने में सादगी दुख है
जब से इक शख़्स छोड़ कर गया है
मेरी सब से बड़ी ख़ुशी दुख है
वैसे तो तेरा दुख बड़ा दुख था
तेरे बा'द अब तेरी कमी दुख है
अब तो ये भी समझ से बाहर है
किस का दुख है जो वाक़ई दुख है
मुझे सबने यही बताया है
कि तेरे सीने में कोई दुख है
मैं तुम्हें भूलने लगी हूँ अब
मैं समझती थी दाइमी दुख है
और तो क्या कमाया है हम ने
सारा सरमाया बस यही दुख है
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जो शख़्स करता रहा बरसों इक मकाँ रौशन
न जाने कर रहा है कौन सा जहाँ रौशन
न जाने कर रहा है कौन सा जहाँ रौशन
है इन दियों का मुक़द्दर भी बेटियों जैसा
कहाँ बनाए गए और हुए कहाँ रौशन
हमारी ओर तो होती है अब बहार उदास
तुम्हारे होने से तो होगी वाँ ख़िज़ाँ रौशन
कि इन ग़मों से निकलना बहुत कठिन भी नहीं
दिल-ओ-दिमाग़ रहे बस रवाँ दवाँ रौशन
बिछड़ते वक़्त थी माँ बाप के लबों पे दुआ
ख़ुदा रखे तुझे बिटिया सदा वहाँ रौशन
यही बनेंगी तुम्हारे भी डूबने का सबब
जो शक्ल से नज़र आती हैं कश्तियाँ रौशन
सुख़नवरों में गिना जाएगा तुझे भी सहर
ख़ुदा बनाए रखे तेरा ये गुमाँ रौशन
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हम हैं चढ़ते हुए दरिया में उतरने वाले
हम कहाँ तेज़ हवाओं से हैं डरने वाले
हम कहाँ तेज़ हवाओं से हैं डरने वाले
लौट कर आए कोई कुछ तो ख़बर हो हम को
किस जहाँ को चले जाते हैं ये मरने वाले
सौ दफ़ा गिर के उठे, उठ के चले हैं सो हम
सख़्ती-ए-राह से हरगिज़ नहीं डरने वाले
आप जैसे तो कई देखे हैं हम ने लेकिन
आप से बढ़ के नहीं देखे मुकरने वाले
तुम न ज़िद्दी हो न ख़ुद सर न कोई सब्र-ओ-ज़ब्त
ऐसे होते हैं भला हद से गुज़रने वाले
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