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ख़ूब-सूरत महल थे कभी
अब बने हैं वो बंजर यहाँ
हो गए ख़ाक वो लोग सब
थे कभी जिन के लश्कर यहाँ
मौत सबका मुक़द्दर बना
फिर हो अकबर या कम-तर यहाँ
देखते तो सभी हैं मगर
भूलते मौत अक्सर यहाँ
यारी नायाब है जान ले
वो हक़ीक़ी है गौहर यहाँ
हो मुहब्बत तिरी ज़िंदगी
बस यहीं उम्दा जौहर यहाँ
माल तेरा सभी फ़ानी है
बस मुहब्बत है रहबर यहाँ
देख ‘बेताब’ तू ग़ौर कर
मौत जो रोज़ मज़हर यहाँ
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दुनिया का क्यूँ शौक़ रखता इतना है
तू यहाँ क्या लाया क्या ले जाना है
तू यहाँ क्या लाया क्या ले जाना है
कितनी भी तू कर मुहब्बत दुनिया से
वक़्त होने पर यहाँ से चलना है
किस झमेला में फँसा है तू यहाँ
ऐ मुसाफ़िर पल का ये अफ़साना है
जो तू शानों पे अकड़ता अपनी है
चंद लम्हों का ये बस परवाना है
छोड़ गुमराही ये अब ‘बेताब’ तू
देख कितना आरज़ी अफ़साना है
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मैं हूँ जवाब ढूँढ़ रहा दर-ब-दर यहाँ
मैं हूँ सवाल पूछ रहा हो निडर यहाँ
मैं हूँ सवाल पूछ रहा हो निडर यहाँ
बोले ज़माना बस कहा जो मान ले उसे
मत पूछ अब सवाल किसी से इधर यहाँ
झूठी तसल्ली का नहीं क़ायल कभी मैं तो
हरगिज़ बने न मेरा कभी कोई घर यहाँ
सब झूठ जो कहे न कभी बन सके वो हक़
सच्चे जवाब ही से मैं रोकूँ सफ़र यहाँ
शायद सवाल का न कहीं भी जवाब है
समझाने पर किधर सुने ये दिल मगर यहाँ
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"हुसैन"
मेरे प्यारे बेटे हुसैन
नहीं है तेरे बिना दिल को चैन
जब याद आती है तेरी
आँख भर आती है मेरी
मुझे तो बहुत थी ख़ुशी तेरे आने की
क्या थी तुझे इतनी जल्दी जाने की
इतने मासूम को कभी बीमार देखा न था
ऐसा भारी जनाज़ा कभी सोचा न था
जब तू हद से ज़्यादा याद आता है
तेरा बाप क़लम उठा के कुछ लिख लेता है
ज़माना पूछता है सफ़ेदी का सबब मुँह पर
कौन जानता है भार तेरे जनाज़े का रूह पर
शायद बेहतर मक़ाम पर है तू
तेरी तकलीफ़ों से अमान पर है तू
बस यही बोलता हूँ
तेरे माँ के आँसू पोछता हूँ
Read Fullनहीं है तेरे बिना दिल को चैन
जब याद आती है तेरी
आँख भर आती है मेरी
मुझे तो बहुत थी ख़ुशी तेरे आने की
क्या थी तुझे इतनी जल्दी जाने की
इतने मासूम को कभी बीमार देखा न था
ऐसा भारी जनाज़ा कभी सोचा न था
जब तू हद से ज़्यादा याद आता है
तेरा बाप क़लम उठा के कुछ लिख लेता है
ज़माना पूछता है सफ़ेदी का सबब मुँह पर
कौन जानता है भार तेरे जनाज़े का रूह पर
शायद बेहतर मक़ाम पर है तू
तेरी तकलीफ़ों से अमान पर है तू
बस यही बोलता हूँ
तेरे माँ के आँसू पोछता हूँ
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