मैं हूँ जवाब ढूँढ़ रहा दर-ब-दर यहाँ

मैं हूँ सवाल पूछ रहा हो निडर यहाँ

बोले ज़माना बस कहा जो मान ले उसे
मत पूछ अब सवाल किसी से इधर यहाँ

झूठी तसल्ली का नहीं क़ायल कभी मैं तो
हरगिज़ बने न मेरा कभी कोई घर यहाँ

सब झूठ जो कहे न कभी बन सके वो हक़
सच्चे जवाब ही से मैं रोकूँ सफ़र यहाँ

शायद सवाल का न कहीं भी जवाब है
समझाने पर किधर सुने ये दिल मगर यहाँ

— Betaab Murtaza

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