"हुसैन"
मेरे प्यारे बेटे हुसैन
नहीं है तेरे बिना दिल को चैन
जब याद आती है तेरी
आँख भर आती है मेरी
मुझे तो बहुत थी ख़ुशी तेरे आने की
क्या थी तुझे इतनी जल्दी जाने की
इतने मासूम को कभी बीमार देखा न था
ऐसा भारी जनाज़ा कभी सोचा न था
जब तू हद से ज़्यादा याद आता है
तेरा बाप क़लम उठा के कुछ लिख लेता है
ज़माना पूछता है सफ़ेदी का सबब मुँह पर
कौन जानता है भार तेरे जनाज़े का रूह पर
शायद बेहतर मक़ाम पर है तू
तेरी तकलीफ़ों से अमान पर है तू
बस यही बोलता हूँ
तेरे माँ के आँसू पोछता हूँ
— Betaab Murtaza















