हो कहीं तुम यहाँ जब नहीं
दिल मिरा ख़ुश रहे तब नहीं
जो न बेताब दिल को करे
इक हुई ही कभी शब नहीं
क्या कभी मैं तुझे भूला हूँ
याद तेरी बता कब नहीं
ज़िंदगी तो चले है मगर
अब लगे ख़ुश कहीं रब नहीं
जो ग़म-ए-दिल बयाँ कर सके
वो मिरे पास है लब नहीं
— Betaab Murtaza















