न जाने कब यहाँ बरसात होगी
न जाने कब यहाँ वो बात होगी
हमें वो देख ले हम भी उसे बस
न जाने कब यहाँ वो रात होगी
न कोई आरज़ू इस के सिवा है
किसी दिन तो यहाँ वो साथ होगी
अभी क़िस्मत न मेरा साथ दे तो
किसी दिन तो मिरे वो हाथ होगी
कहीं वो जो मिले सब हार जाऊँ
न जाने कब यहाँ वो मात होगी
— Betaab Murtaza















