be-aarzoo bhi khush hain zamaane mein baaz log | बे-आरज़ू भी ख़ुश हैं ज़माने में बाज़ लोग

  - Shuja Khawar

बे-आरज़ू भी ख़ुश हैं ज़माने में बाज़ लोग
याँ आरज़ू के साथ भी जीना हराम है

  - Shuja Khawar

Aadmi Shayari

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    या तो जो ना-फ़हम हैं वो बोलते हैं इन दिनों
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    Shuja Khawar
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    दोस्त का घर और दुश्मन का पता मालूम है
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    इस के आगे हम को सारा रास्ता मालूम है

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    या तो जो ना-फ़हम हैं वो बोलते हैं इन दिनों
    या जिन्हें ख़ामोश रहने की सज़ा मालूम है

    शेर पर तो आप की क़ुदरत मुसल्लम है 'शुजा'
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    Shuja Khawar
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    हज़ार रंग में मुमकिन है दर्द का इज़हार
    तिरे फ़िराक़ में मरना ही क्या ज़रूरी है
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    यहाँ तो क़ाफ़िले भर को अकेला छोड़ देते हैं
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    क़लम में ज़ोर जितना है जुदाई की बदौलत है
    मिलन के बाद लिखने वाले लिखना छोड़ देते हैं

    कभी सैराब कर जाता है हम को अब्र का मंज़र
    कभी सावन बरस कर भी पियासा छोड़ देते हैं

    ज़मीं के मसअलों का हल अगर यूँ ही निकलता है
    तो लो जी आज से हम तुम से मिलना छोड़ देते हैं

    मोहज़्ज़ब दोस्त आख़िर हम से बरहम क्यूँ नहीं होंगे
    सग-ए-इज़हार को हम भी तो खुल्ला छोड़ देते हैं

    जो ज़िंदा हो उसे तो मार देते हैं जहाँ वाले
    जो मरना चाहता हो उस को ज़िंदा छोड़ देते हैं

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