पुरानी याद का इतना सहारा है
यही लगता हमारा था हमारा है
चले जाते हैं हम मझधार पर ख़ुद ही
चले थे जो किनारा था किनारा है
लगा क्यों डाँट से नाराज़ वो भी मैं
तू ही हर पल गवारा था गवारा है
दुआ से माँ की सबकुछ हो गया मुमकिन
बुलंदी पर सितारा था सितारा है
मैं कहने को कहूँगा सुनना मत बेटा
कहूँगा मैं नकारा था नकारा है
बड़ा मुश्किल है फिर भी कह रहा हूँ दोस्त
तेरे बिन भी गुज़ारा था गुज़ारा है
जवानी में किया मासूमियत का क़त्ल
'धरम' बचपन दुलारा था दुलारा है
अना का सहारा लिए जा रहा है
ज़बाँ से किनारा किए जा रहा है
सुनो ना सुनो ना वो चिल्लाता था जब
लगा दर्द सारा पिए जा रहा है
रात भर ये तू जो महफ़िल है सजाता
सुबह फिर ग़मगीन होकर ये बताता
देख ख़ुशियाँ तू तो ज़ीरो की मनाता
ज़ीरो का है ग़म ये सारा फिर जताता
मंज़िल कभी भी आख़िरी होती नहीं
इच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं
इज़हार करना इश्क का तो है तुझे
वो सोचने से तो तेरी होती नहीं