पुरानी याद का इतना सहारा है
यही लगता हमारा था हमारा है
यही लगता हमारा था हमारा है
चले जाते हैं हम मँझधार पर ख़ुद ही
चले थे जो किनारा था किनारा है
लगा क्यूँ डाँट से नाराज़ वो भी मैं
तू ही हर पल गवारा था गवारा है
दुआ से माँ की सब कुछ हो गया मुमकिन
बुलंदी पर सितारा था सितारा है
मैं कहने को कहूँगा सुनना मत बेटा
कहूँगा मैं नकारा था नकारा है
बड़ा मुश्किल है फिर भी कह रहा हूँ दोस्त
तेरे बिन भी गुज़ारा था गुज़ारा है
जवानी में किया मासूमियत का क़त्ल
'धरम' बचपन दुलारा था दुलारा है
10
1 Like
मेरी ग़ज़ल में दोष मिल ही जाने थे
दावा नहीं अब तक किया शाइ'र हूँ मैं
दावा नहीं अब तक किया शाइ'र हूँ मैं
8
5 Likes
7
1 Like
रात भर ये तू जो महफ़िल है सजाता
सुब्ह फिर ग़मगीन होकर ये बताता
सुब्ह फिर ग़मगीन होकर ये बताता
देख ख़ुशियाँ तू तो ज़ीरो की मनाता
ज़ीरो का है ग़म ये सारा फिर जताता
5
2 Likes
मंज़िल कभी भी आख़िरी होती नहीं
इच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं
Read Fullइच्छा सभी पूरी मेरी होती नहीं
3
1 Like










