काश ऐसी भी कोई सूरत होख़्वाब है जो मिरा हक़ीक़त होसोचता हूँ तो दिल धड़कता हैतुम मिरी साँस की सहूलत होतुम ही को देख कर गुज़ारी हैज़िंदगी ऐसी जिस से वहशत होख़ुश्की लब पर नहीं तिरे जँचतीचूम लूँ मैं अगर इजाज़त होहम नहीं जौन पर न जाने क्यूँतुम मिरी आख़िरी मोहब्बत हो— Meem Mohammed