उस के चेहरे पे जो तिल है वो सितारा सा लगे
एक लम्हा रुक के देखो चाँद सारा सा लगे
हुस्न जब पर्दा उठाए धड़कनें मदहोश हों
हर अदा उस की मुझे अब इक नज़ारा सा लगे
शहर की गलियों में जब आईना बन कर वो चले
हर नज़र उस पर ठहर कर बेकरारा सा लगे
मेरे अफ़्साने में शामिल है जो उस का तिल ही है
उस के होंठों का तबस्सुम राज़दारा सा लगे
— Meem Mohammed















