हवा चल रही है फ़ज़ा कुछ कहेगी
उदासी हमारी सदा कुछ कहेगी
न बोले कोई और आँखें भी ख़ामोश
मगर ख़ामुशी की सदा कुछ कहेगी
तुम्हें सोचते ही निकलती है आहट
मोहब्बत की ये इंतिहा कुछ कहेगी
बिछड़ने का लम्हा है पत्थर सा लेकिन
यही बेबसी ये दुआ कुछ कहेगी
मैं तन्हा सही पर यक़ीं है मुझे ये
तेरी याद मुझ से वफ़ा कुछ कहेगी
— Meem Mohammed















