निभा न पाया किया था जो तुझ से वादा दिल
    चुड़ैल से मैं नहीं छीन पाया आधा दिल
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    ख़ामख़ा ही तुझे मैं छुपाता रहा
    दौर ये चल रहा है सर-ए-आम का
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    यार से बिछड़े हुए अरसा हुआ है
    ये गला पानी को अब तरसा हुआ है

    भीग नइँ पाया कभी बरसात में मैं
    मेरा बादल और कहीं बरसा हुआ है
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    Madan Gopal 'AloukiK'
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    मेरा ही बस उठाते नहीं कॉल वो
    मेरा नंबर नहीं है किसी काम का
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    आदत मिरी कितनी बुरी बन जाती है
    जब शायरी ही जिंदगी बन जाती है

    आ जाऊँ महबूबा के मैं जो सामने
    वो देख मुझको अजनबी बन जाती है

    रोता बिलखता देखकर बच्चों को माँ
    फिर छोड़ घूँघट आदमी बन जाती है

    मछली जो इक आ जाए उनके जाल में
    नाख़ुश मछेरों की ख़ुशी बन जाती है

    बुझने लगे जब इश्क़ की वो ज्योति तो
    माँ की मोहब्बत रौशनी बन जाती है

    आकर 'अलौकिक' नइँ मिले फ़ुर्सत से जो
    फ़ुर्सत का होना बेक़सी बन जाती है
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    Madan Gopal 'AloukiK'
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    नहीं तू पूछ उसके बाद मेरी सोच कैसी है
    ज़रा ये पूछ सीने पे लगी ये मोच कैसी है
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    हड्डियाँ ख़ामख़ा ही अकड़ करती हैं
    उसके छू लेने से चूर हो जाता हूँ
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    तुझको छूने का हक़ भी मिला ही नहीं
    मेरा तेरे बदन से गिला ही नहीं

    तू ने जो रक्खा पत्थर मिरे सीने पे
    ढीठ इतना कि पत्थर हिला ही नहीं
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    Madan Gopal 'AloukiK'
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    हौसला थोड़ा सा जुटा लेना
    अपनों में से मुझे छु‌‌पा लेना
    Madan Gopal 'AloukiK'
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    कभी जलती हुई लिखती चिता मेरी
    कभी ज़िंदा मुझे वो लाश लिखती है
    Madan Gopal 'AloukiK'
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