तुझ को छूने का हक़ भी मिला ही नहींमेरा तेरे बदन से गिला ही नहींतू ने जो रक्खा पत्थर मिरे सीने पेढीठ इतना कि पत्थर हिला ही नहीं— Madan Gopal 'AloukiK'