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Divy Kamaldhwaj
SHER
भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
10
SHER
धीरे धीरे कुछ भी आसाँ नहीं होता
धीरे धीरे बस आदत हो जाती है
Divy Kamaldhwaj
9
SHER
भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल
रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
8
SHER
7
SHER
आज फिर इज़हार करते हैं सनम
आपसे ही प्यार करते हैं सनम
Divy Kamaldhwaj
6
SHER
उड़ाने पर जो आ जाऊँ उड़ा दूँ होश दुनिया के
मगर मैं फूल से तितली उड़ा सकता नहीं यारों
Divy Kamaldhwaj
5
GHAZAL
दास्तान-ए-ज़िन्दगी के सिर्फ़ कुछ किरदार सच
झूठ है ज़ाती मकाँ और सब किराया-दार सच
Divy Kamaldhwaj
4
GHAZAL
राज़ जो भी था नज़र में आ गया
आप का चेहरा नज़र में आ गया
Divy Kamaldhwaj
3
SHER
बहुत कुछ बोलना है पर अभी ख़ामोश रहने दो
ख़मोशी बोलती है तो, बड़ी आवाज़ करती है
Divy Kamaldhwaj
2
SHER
गर उदासी, चिड़चिड़ापन, जान देना प्यार है
माफ़ करना, काम मुझ को और भी हैं दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
1
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