मुझ सेे दिन रात ये आईना
कर रहा बात ये आईना
टूट ही जाएँगे लोग वो
जिन की है ज़ात ये आईना
जब हँसू तो हँसे साथ ये
रोए भी साथ ये आईना
भूल जो जाऊँ तो सामने
लाए औक़ात ये आईना
— Meem Mohammed
कर रहा बात ये आईना
टूट ही जाएँगे लोग वो
जिन की है ज़ात ये आईना
जब हँसू तो हँसे साथ ये
रोए भी साथ ये आईना
भूल जो जाऊँ तो सामने
लाए औक़ात ये आईना
Other ghazal from the same pen
Shers of bekhabri.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling