Meaning of

ज़ात

zaat • ذات

मूल; पहचान; स्वभाव

essence; identity; nature

جوہر; شناخت; فطرت

Arabic

दौलतें मुद्दा बनीं या ज़ात आड़े आ गई इश्क़ में कोई न कोई बात आड़े आ गई — Baghi Vikas
ये हुनर रब ने मेरी ज़ात में रक्खा हुआ है अच्छे अच्छो को भी औक़ात में रक्खा हुआ है — Fareeha Naqvi
बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता — Afzal Khan
असर करती है कोई-कोई बात आहिस्ता आहिस्ता समझ में आते हैं कुछ मोजज़ात आहिस्ता आहिस्ता — Ameer Imam
ज़िंदगी कहते हैं जिस को चार दिन की बात है बस हमेशा रहने वाली इक ख़ुदा की ज़ात है — Unknown
ज़ात दर ज़ात हम सफ़र रह कर अजनबी अजनबी को भूल गया — Jaun Elia
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने — Sahir Ludhianvi

'ज़ात' शब्द व्यक्ति के अस्तित्व के मूल को दर्शाता है, वह आंतरिक पहचान जो बाहरी विशेषताओं से परे होती है। कविता में, यह अक्सर आत्म-समझ की यात्रा को दर्शाता है, एक खोज जो सामाजिक भूमिकाओं और अपेक्षाओं के नीचे छिपे सच्चे सार की होती है।

कवि 'ज़ात' का उपयोग आत्म-खोज और अस्तित्ववादी चिंतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर बाहरी दिखावे या सामाजिक लेबल के साथ विपरीत किया जाता है, जो दैनिक जीवन में पहने जाने वाले मुखौटों और व्यक्ति के सच्चे स्व के बीच के तनाव को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ात' पहचान के गहन चिंतन को आमंत्रित करता है। यह आत्मा के शांत सत्य को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण है।