Meaning of

ज़ाईदा

zaa'ida • زائیدہ

जन्मा; उत्पन्न

born; emerged

پیدا ہوا; ابھرا

Arabic

किसी लड़की के चक्कर में न पड़ना दोस्त तुम्हें बर्बाद कर के बेच खाएगी — ABhishek Parashar
नवजात एक ख़ाक सनी राह पर पड़ी इंसान आज आसिम-ए-किरदार हो गया — Udit Narayan Mishra
सारी रात ही ये चैन से सोने नहीं देती तेरी याद जैसे मान लो नौ-ज़ाइदा बच्ची — Sarvjeet Singh
ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुम सेे तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे जब कभी भी तन्हाई नोच कर के खाएगी मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे — Prashant Kumar
मौत आई तो डाँट खाएगी इतनी भी कोई देर करता है — Kuldeep Tripathi KD

ज़ाईदा शब्द उद्भव और जन्म की भावना को जगाता है, एक ऐसा आरंभ जो शारीरिक और रूपक दोनों है। कविता में, यह अक्सर नए विचारों के उदय या उन भावनाओं के जन्म का प्रतीक होता है जो पहले सुप्त थीं।

कवि ज़ाईदा का उपयोग एक नए सवेरे की ताजगी, प्रेम के जन्म, या छुपे हुए सत्य के उद्भव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो अंत या निष्कर्ष को दर्शाते हैं, शुरुआत की सुंदरता को उजागर करते हैं।

ज़ाईदा शुरुआत के सार को पकड़ता है, जीवन के निरंतर नवीनीकरण के चक्र की याद दिलाता है।