Shaad Imran

Top 10 of Shaad Imran

    हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
    वही होता है जो, वो हो रहा है

    ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
    ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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    उसको अपने पास बिठा लेने से ही
    धड़कन तेज़ और साँसें भारी होती है

    'शाद' तू सब कुछ बढ़ा चढ़ा के कहता है
    कौनसी लड़की इतनी प्यारी होती है?
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    ऐसा नहीं कि मैंने मोहब्बत नहीं करी
    इज़हार करने ही कि बस हिम्मत नहीं करी
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    आजकल हम जफ़ा पे लिखते हैं
    यानी तेरी अदा पे‌ लिखते हैं
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    मेरे हाथों में अपना हाथ रखकर
    कहा उसने कभी ये हाथ तो न छोड़ोगे
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    आरज़ू दीद-ए-ख़ुदा की है
    आरज़ू भी हमनें क्या की है

    तुझको देखें तो होश ही न रहे
    अदाएँ इस क़दर बला की है

    किसी सूरत तुझे अपना बना ले
    बात लेकिन तेरी रज़ा की है

    तुमने जिस से भी की बेवफ़ाई की
    हमने जिस से भी की वफ़ा की है

    शायरी होगी उसी शख़्स से "शाद"
    ज़िन्दगी जिसने भी तबाह की है
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    बात उसकी कोई न टाली जाए
    सोचता हूँ नई पटा ली जाए

    देख कर उसको ये आया ख़याल
    अपने सर पर ये बला ली जाए

    अकेलेपन में और क्या कीजे
    वैसी पिक्चर ही चला ली जाए

    अब उसकी याद आने वाली है
    अब इक सिगरेट जला ली जाए
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    उसके इश्क़ में बाल बढ़ाने वालों सुन लो
    उसके घर वाले तो पैसा देखेंगे
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    मैं न अच्छा न बुरा निकला
    मुझसे हर शख़्स क्यूँ ख़फ़ा निकला

    रहा भलाई का ज़माना नहीं
    यही हर बार तजुर्बा निकला

    जिसको देखा नहीं किसी ने कभी
    ये गजब है कि वो ख़ुदा निकला

    चाहने वालों में तेरे सबसे अव्वल
    मेरा ही नाम हर दफ़ा निकला

    देख कर होश खो बैठी यशोदा
    लाल के मुँह में कहकशां निकला

    'शाद' तेरा इश्क़ एक तरफ़ा था
    फिर क्यूँ कहना वो बेवफ़ा निकला
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    दर्द-ए-दिल की दवा नहीं होती
    इश्क़ में इल्तिजा नहीं होती

    बना देने से डर जहन्नुम का
    बंदगी या ख़ुदा नहीं होती

    ज़िन्दगी बेवफ़ा ही होती है
    मौत पर बेवफ़ा नहीं होती

    कुछ तो गुज़री है तेरे दिल पे 'शाद'
    शायरी बेवजह नहीं होती
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