मैं न अच्छा न बुरा निकला
मुझ सेे हर शख़्स क्यूँँ ख़फ़ा निकला
रहा भलाई का ज़माना नहीं
यही हर बार तजुर्बा निकला
जिसको देखा नहीं किसी ने कभी
ये ग़ज़ब है कि वो ख़ुदा निकला
चाहने वालों में तेरे सब सेे अव्वल
मेरा ही नाम हर दफ़ा निकला
देख कर होश खो बैठी यशोदा
लाल के मुँह में कहकशां निकला
'शाद' तेरा इश्क़ एक तरफ़ा था
फिर क्यूँँ कहना वो बे-वफ़ा निकला
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