उस से बिछड़ कर मौत का रस्ता देखेंगे
आग लगाकर ख़ुद को जलता देखेंगे
रोते हुए वो और भी अच्छे लगते है
सुनते ही वो दौड़ के शीशा देखेंगे
उसके 'इश्क़ में बाल बढ़ाने वाले सुन
उसके घर वाले तो पैसा देखेंगे
ख़्वाहिश है कि उसकी गोद में दम निकले
लेकिन उसको कैसे रोता देखेंगे
पढ़ते पढ़ते, 'शाद' तेरी ग़ज़लों में लोग
अपने अपने यार का चेहरा देखेंगे
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