आरज़ू दीद-ए-ख़ुदा की है
आरज़ू भी हमनें क्या की है
तुझ को देखें तो होश ही न रहे
अदाएँ इस क़दर बला की है
किसी सूरत तुझे अपना बना ले
बात लेकिन तेरी रज़ा की है
तुम ने जिस से भी की बे-वफ़ाई की
हम ने जिस से भी की वफ़ा की है
शा'इरी होगी उसी शख़्स से "शाद"
ज़िन्दगी जिस ने भी तबाह की है
— Shaad Imran















