waqt aawaargi men zaayaa' kiya | वक़्त आवारगी में ज़ाया' किया

  - Shaad Imran

वक़्त आवारगी में ज़ाया' किया
दर्द को शायरी में ज़ाया' किया

जब भी मौक़ा मिला मोहब्बत का
शैख़ ने बंदगी में ज़ाया' किया

मुझ से ग़लती हुई कि तुझ सा चराग़
हल्की सी तीरगी में ज़ाया' किया

इक मिला था मुझे तेरे जैसा
जिसको तेरी कमी में ज़ाया' किया

हुस्न होता है नाज़ करने को
तूने क्यूँँ सादगी में जाया किया

कुल मेरी 'उम्र के बराबर है
वक़्त जो ज़िन्दगी में ज़ाया' किया

शाद जैसे को भी रक़ीबों ने
आपसी दुश्मनी में ज़ाया' किया

  - Shaad Imran

Zindagi Shayari

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