Ram Singar Malak

Top 10 of Ram Singar Malak

    तेरी नाज़ुकी बदन की कोई पंखुड़ी हो जैसे
    तू महक रही है ऐसे कली संदली हो जैसे

    तू जो मुझ से रूठ जाए तो लगे है मुझ को ऐसे
    मेरी ज़िंदगी में आई कोई खलबली हो जैसे

    तेरी याद की कफ़स से कभी जो निकलना चाहा
    मैं समाता जाऊँ इस
    में ज़मीं दलदली हो जैसे

    तू जो साथ मेरे थी तो थी अमीरी साथ मेरे
    तुझे खो के यूँ लगा है मिली मुफ़्लिसी हो जैसे

    तेरा रूप है सलोना तेरा हुश्न है क़यामत
    तेरे होंठ शबनमी हैं नई ताज़गी हो जैसे

    मैं नहीं ये चाहता हूँ तुझे और कोई चाहे
    तुझे चाहता हूँ ऐसे कोई मतलबी हो जैसे

    तेरी ओर खींचता है मुझे जाने कैसा जादू
    तुझे पूजता 'मलक' यूँ कोई बंदगी हो जैसे
    Read Full
    Ram Singar Malak
    10
    1 Like
    तेरे ही जैसे यार तो, इंसान मैं भी हूँ
    इस ज़िन्दगी के ग़म से, परेशान मैं भी हूँ

    रिश्ते जो पहले ख़ून के थे ग़ैर हो गए
    अपने ही घर में आज तो, मेहमान मैं भी हूँ

    तन्हाइयों का रोना न रोया करो ऐ दश्त
    दुनिया के भीड़ भाड़ में, वीरान मैं भी हूँ

    कहता था उम्र भर कभी बदलेंगे हम नहीं
    वो आज क्यूँ बदल गया, हैरान मैं भी हूँ

    नज़रे करम हो मुझ पे भी फ़ुर्सत मिले अगर
    तेरी हसीन आँखों पे क़ुर्बान मैं भी हूँ

    ऐसा नहीं के तुम ही, जले हो जुदाई में
    तुझ से “मलक” बिछड़ के तो, बे-जान मैं भी हूँ
    Read Full
    Ram Singar Malak
    9
    1 Like
    इश्क़ की बातों में जो आ बैठा
    उस को अपना ख़ुदा बना बैठा

    मेरा किरदार ही रहा ऐसा
    हँसते चेहरों को मैं रुला बैठा

    कर के साज़िश मेरी तबाही की
    रोने वालों की सफ़ में जा बैठा

    क़त्ल होना है लाज़िमी उस का
    मजहब -ए- इश्क़ जो बना बैठा

    चाँद रातों का उस की क्या डूबा
    मेरा दीपक तलक बुझा बैठा।

    थी नसीहत मेरे बुजुर्गों की
    दुश्मनों को गले लगा बैठा

    ज़िन्दगी थी लिखी जहाँ उस की
    जान अपनी वहीं गँवा बैठा
    Read Full
    Ram Singar Malak
    8
    1 Like
    ग़ैरों के हिस्से ख़्वाब यहाँ कौन रखता है
    नाज़ुक से दिल में ताब यहाँ कौन रखता है

    हर शख़्स अपने होंठों पे रखता सवाल हैं
    लब पे कोई जबाब यहाँ कौन रखता है

    हर शक्ल में छुपी है कई शक्ल देखिए
    शक्लों पे अब हिज़ाब यहाँ कौन रखता है

    दौलत कमाने की यहाँ इक होड़ सी लगी
    अच्छा बुरा हिसाब यहाँ कौन रखता है

    दिल जान से वो चाहता, ये है ख़बर मुझे
    कम ज़्यादा का हिसाब यहाँ कौन रखता है

    आँखों सा अब सुरूर कहाँ मय-कदे में है
    इतनी भली शराब यहाँ कौन रखता है

    मेरी बुराई ही नहीं अच्छाई भी तू देख
    बिन काँटों के गुलाब यहाँ कौन रखता है

    अब इश्क़ भी कहीं नहीं लैला सा क़ैस सा
    अब प्यार बे-हिसाब यहाँ कौन रखता है

    हर शय में तो छुपे हैं “मलक” राज़ क्या करें
    ख़ुद को खुली किताब यहाँ कौन रखता है
    Read Full
    Ram Singar Malak
    7
    2 Likes
    ख़त्म होने को ही था बस ज़िंदगी का मसअला
    दरमियाँ आने लगा फिर आशिक़ी का मसअला

    रेल पटरी ज़हर या फिर फाँसी का फंदा चुनूँ
    कश्मकश में डालता है ख़ुद-कुशी का मसअला

    प्यार में जो ग़म मिला हैरानगी की बात क्या
    हम ने देखा प्यार में है ये सभी का मसअला

    मसअला कोई भी हो अक्सर बिखर जाते हैं लोग
    मुझ को शोहरत दे रहा है शा'इरी का मसअला

    मुफ़्लिसी की बात तो करते सियासी लोग पर
    हल नहीं होता कभी भी मुफ़्लिसी का मसअला

    आँख उस की ज़ुल्फ़ उस की बात उस की मय ही मय
    दूर होता ही नहीं है मयकशी का मसअला

    यूँ 'मलक' दिल भी मिले हैं रूह से हम एक हैं
    पर नुज़ूमी कह रहा है कुंडली का मसअला
    Read Full
    Ram Singar Malak
    6
    2 Likes
    वो जिस ने पास में हुश्नजमाल रक्खा है
    उसी ने सब को ही चक्कर में डाल रक्खा है

    वो आबसार के जैसा बहेगा आँखों से
    जो क़तरा आँख में हम ने सँभाल रक्खा है

    इसे अकेले में पलकों से चूम के पढ़ना
    कि ख़त में हम ने कलेजा निकाल रक्खा है

    ये मसअला तो किसी हाल हल नहीं होगा
    जवाब में जो ये तुम ने सवाल रक्खा है

    कढ़ाई कर के मेरा नाम जिस पे लिक्खा था
    वही रुमाल अभी तक सँभाल रक्खा है

    मुझे तो मार ही डाले "मलक" ये तन्हाई
    तुम्हारी याद ने मेरा ख़याल रक्खा है
    Read Full
    Ram Singar Malak
    5
    4 Likes
    साल सोलह का वो यौवन जब चढ़ा पहली दफ़ा
    देख के शर्मा गया था आइना पहली दफ़ा

    फिर कभी मंज़र न गुज़रा आज तक वैसा कभी
    वो तेरे हाथों को मेरा चूमना पहली दफ़ा

    तुम को है मुझ से मुहब्बत राज़ ज़ाहिर कर गया
    वो तुम्हारा मुड़ के मुझ को देखना पहली दफ़ा

    शायराना हो गए अल्फ़ाज़ मिल के आप से
    मैं भी शाइ'र बन गया जब ख़त लिखा पहली दफ़ा

    आप से मिल कर हुई रंगीन मेरी ज़िंदगी
    सारे मौसम से हुआ है वास्ता पहली दफ़ा

    बज़्म में तन्हाई हो तन्हाई में महफ़िल लगे
    प्यार में ये हाल मेरा हो गया पहली दफ़ा

    आप से पहले मलक आए गए कितने हसीं
    आप से ही है जुड़ा ये दिल मेरा पहली दफ़ा
    Read Full
    Ram Singar Malak
    4
    1 Like
    गली से गुज़रा तो देखी है अधखुली खिड़की
    उदास आँखों से मुझ को निहारती खिड़की

    कभी जो खिड़की से राहों को मेरी तकता था
    उसी की राह को अब जैसे देखती खिड़की

    उसी जगह पे कभी एक चाँद रहता था
    बनी हुई सी है अब वो अमावसी खिड़की

    बुझी बुझी सी लगे,खोई खोई रहती है
    किसे सुनाती भला अपनी बेबसी खिड़की

    पलट के देख ले इक बार रूठने वाले
    के बारहा ये सदाएँ लगा रही खिड़की

    हवा थी तेज़ सो खिड़की को बंद करना पड़ा
    घुटन हुई ज़रा सी याद आ गई खिड़की

    खुला था दर तेरा खिड़की खुली भी रहती थी
    कि अब तो भूले से खुलती नहीं कभी खिड़की

    वो जिस को देख के सीने में जान आती थी
    हमारी जान की दुश्मन "मलक" बनी खिड़की
    Read Full
    Ram Singar Malak
    3
    1 Like
    ऐसे तुम्हें भुलाने की कोशिश करेंगे हम
    ख़त को समय की बज़्म में आतिश करेंगे हम

    ये और बात है के क़मर आएगा नहीं
    हुजरे में अपने लाने की ख़्वाहिश करेंगे हम

    जाइज़ सभी है हम ने सुना जंग इश्क़ में
    हर हाल तुझ को पाने की साज़िश करेंगे हम

    कहता रहे ज़माना मुहब्बत गुनाह है
    सौ बार ये हसीन सी लग्ज़िश करेंगे हम

    मर मर के जब है जीना तो ऐ ज़िंदगी तू सुन
    अच्छा है फिर कज़ा से गुज़ारिश करेंगे हम

    बंजर से मेरे दिल में तू बन के बहार आ
    राहों में तेरे फूलों की बारिश करेंगे हम

    हम भी थे कशमकश में “मलक” कह नहीं सके
    वो सोचते थे पहले कि जुम्बिश करेंगे हम
    Read Full
    Ram Singar Malak
    2
    1 Like
    यूँ मुहब्बत को निभाने का हुनर रखता हूँ
    ज़मीं पे आसमाँ लाने का हुनर रखता हूँ

    मुंतज़िर हूँ मेरे जैसा ही तू चाहे वरना
    तुझ को हर हाल में पाने का हुनर रखता हूँ

    थोड़ी शिद्दत से पुकारो मुझे सहरा वालों
    दरिया हूँ प्यास बुझाने का हुनर रखता हूँ

    इतना आसाँ नहीं किरदार समझना मेरा
    हँस के हर ग़म को छुपाने का हुनर रखता हूँ

    हम ने सीखा ही नहीं अपनों से नफ़रत वरना
    ख़ाक में तुझ को मिलाने का हुनर रखता हूँ

    कभी तो अपने लबों पे ज़रा सी जुम्बिश ला
    तेरा हर दर्द मिटाने का हुनर रखता हूँ

    रूठ कर जा रहे हो शौक़ से जाओ लेकिन
    एक रूठे को मनाने का हुनर रखता हूँ

    ऐ मलक देख कभी माँग के तू दिल मेरा
    इश्क़ में जान लुटाने का हुनर रखता हूँ
    Read Full
    Ram Singar Malak
    1
    1 Like