मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं
बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
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दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है
तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
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कोई भी ख़्वाब मुकम्मल नहीं होने देती
ज़िंदगी चैन से मुझ को नहीं सोने देती
ज़िंदगी चैन से मुझ को नहीं सोने देती
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दिल में वहशत है एक उलझन है
आख़िरी रात तो नहीं है मेरी
आख़िरी रात तो नहीं है मेरी
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