ज़मीं पर आगया सूरज या के दिल है
ये क्या जलता है ये कैसे उजाले हैं
ये क्या जलता है ये कैसे उजाले हैं
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इश्क़ बस ये बात को सोच कर नहीं किया
घर की तर्बियत पे मेरे न उँगलियाँ उठे
घर की तर्बियत पे मेरे न उँगलियाँ उठे
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मैं तुझ से मिलने पर ऐसा हुआ हूँ
वगरना आदमी अच्छा भला हूँ
वगरना आदमी अच्छा भला हूँ
धड़कता हूँ किसी के दिल में अक्सर
किसी टूटे हुए दिल की सदा हूँ
मुझे देखो मेरा ये हाल देखो
तुम्हारे इश्क़ में क्या हो गया हूँ
जो पूछा अर्श पर नाले है किस के
सदा आई कि मैं मुफ़लिस की दुआ हूँ
छ्लक उठते है आँखों से मेरे दुख
मैं दर्दो ग़म से कितना भर गया हूँ
मुसाफ़िर तू अगर है तो गुज़र जा
मेरा क्या है कि मैं इक रास्ता हूँ
मिलूँगा हश्र में तुझ से ऐ साहिल
तिरी दुनिया से अब मैं जा रहा हूँ
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मेरे भी पाओ रुक रहे थे गांव से जाते हुए
जब उस की आँख में आँसू थे हाथ हिलाते हुए
जब उस की आँख में आँसू थे हाथ हिलाते हुए
तू मेरे ख़द-ओ-ख़ाल बना भी ले मुसव्वीर मगर
इक उम्र ही लगेगी मेरी शोख़ी बनाते हुए
इल्ज़ाम आखिरस उसी इंसाँ पे लगाया गया
वो जिस के हाथ जल गए थे आग बुझाते हुए
ख़्वाहिश को रौन्दना पड़ता है ख़ुद पैरों तले
घर की हर इक जरुरतो का भार उठाते हुए
मेरे नजूमी राज़ कहीं खोल न दे इस लिए
अक्सर झिझकता हूँ अपना हाथ दिखाते हुए
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तक़ाज़ा है इक और दिखाओगे क्या-क्या
ज़मीं-आसमाँ सर उठाओगे क्या-क्या
ज़मीं-आसमाँ सर उठाओगे क्या-क्या
हैं दरिया भी, सहरा भी, ग़म भी, ख़ुशी भी
इन आँखों में हमदम छुपाओगे क्या-क्या
मुझे पढ़ने वाले कहेंगे बुरा सब
फ़साने में मुझ को बताओगे क्या-क्या
है ना-काम कोशिश भुलाने की मुझ को
मेरी तुम निशानी मिटाओगे क्या-क्या
गिरेबां तेरा चाक हातो में ज़ंजीर
'रज़ा' इश्क़ में और कमाओगे क्या-क्या
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