Raza sahil

Top 10 of Raza sahil

    ज़मीं पर आगया सूरज या के दिल है
    ये क्या जलता है ये कैसे उजाले हैं
    Raza sahil
    10
    1 Like
    इश्क़ बस ये बात को सोच कर नहीं किया
    घर की तर्बियत पे मेरे न उँगलियाँ उठे
    Raza sahil
    8
    0 Likes
    काम अच्छा तो कर गया हूँ मैं
    क्यूँ नज़र से उतर गया हूँ मैं

    उस को अहसास हो मेरे दुख का
    कर के वा'दा मुकर गया हूँ मैं

    कोई मुझ को समेट ले आ कर
    ज़र्रा-ज़र्रा बिखर गया हूँ मैं

    रोज़े महशर हो क्या ख़ुदा जाने
    जो न करना था कर गया हूँ मैं

    चढ़ के सर बोलते हैं तिनके भी
    जब से यारों सुधर गया हूँ मैं
    Read Full
    Raza sahil
    7
    0 Likes
    मैं तुझ से मिलने पर ऐसा हुआ हूँ
    वगरना आदमी अच्छा भला हूँ

    धड़कता हूँ किसी के दिल में अक्सर
    किसी टूटे हुए दिल की सदा हूँ

    मुझे देखो मेरा ये हाल देखो
    तुम्हारे इश्क़ में क्या हो गया हूँ

    जो पूछा अर्श पर नाले है किस के
    सदा आई कि मैं मुफ़लिस की दुआ हूँ

    छ्लक उठते है आँखों से मेरे दुख
    मैं दर्दो ग़म से कितना भर गया हूँ

    मुसाफ़िर तू अगर है तो गुज़र जा
    मेरा क्या है कि मैं इक रास्ता हूँ

    मिलूँगा हश्र में तुझ से ऐ साहिल
    तिरी दुनिया से अब मैं जा रहा हूँ
    Read Full
    Raza sahil
    6
    0 Likes
    मुझे तुम सिर्फ़ अफ़्साना ना समझो
    सुनो मैं एक सच्ची दास्ताँ हूँ
    Raza sahil
    5
    0 Likes
    निकल के दिल से आँखों के जो शहर में हुए थे यकजा
    अब उन दुखों को आसुँओं की शक्ल में बहा रहा हूँ
    Raza sahil
    3
    1 Like
    मेरे भी पाओ रुक रहे थे गांव से जाते हुए
    जब उस की आँख में आँसू थे हाथ हिलाते हुए

    तू मेरे ख़द-ओ-ख़ाल बना भी ले मुसव्वीर मगर
    इक उम्र ही लगेगी मेरी शोख़ी बनाते हुए

    इल्ज़ाम आखिरस उसी इंसाँ पे लगाया गया
    वो जिस के हाथ जल गए थे आग बुझाते हुए

    ख़्वाहिश को रौन्दना पड़ता है ख़ुद पैरों तले
    घर की हर इक जरुरतो का भार उठाते हुए

    मेरे नजूमी राज़ कहीं खोल न दे इस लिए
    अक्सर झिझकता हूँ अपना हाथ दिखाते हुए
    Read Full
    Raza sahil
    2
    1 Like
    तक़ाज़ा है इक और दिखाओगे क्या-क्या
    ज़मीं-आसमाँ सर उठाओगे क्या-क्या

    हैं दरिया भी, सहरा भी, ग़म भी, ख़ुशी भी
    इन आँखों में हमदम छुपाओगे क्या-क्या

    मुझे पढ़ने वाले कहेंगे बुरा सब
    फ़साने में मुझ को बताओगे क्या-क्या

    है ना-काम कोशिश भुलाने की मुझ को
    मेरी तुम निशानी मिटाओगे क्या-क्या

    गिरेबां तेरा चाक हातो में ज़ंजीर
    'रज़ा' इश्क़ में और कमाओगे क्या-क्या
    Read Full
    Raza sahil
    1
    2 Likes