मैं तुझ से मिलने पर ऐसा हुआ हूँ

वगरना आदमी अच्छा भला हूँ

धड़कता हूँ किसी के दिल में अक्सर
किसी टूटे हुए दिल की सदा हूँ

मुझे देखो मेरा ये हाल देखो
तुम्हारे इश्क़ में क्या हो गया हूँ

जो पूछा अर्श पर नाले है किस के
सदा आई कि मैं मुफ़लिस की दुआ हूँ

छ्लक उठते है आँखों से मेरे दुख
मैं दर्दो ग़म से कितना भर गया हूँ

मुसाफ़िर तू अगर है तो गुज़र जा
मेरा क्या है कि मैं इक रास्ता हूँ

मिलूँगा हश्र में तुझ से ऐ साहिल
तिरी दुनिया से अब मैं जा रहा हूँ

— Raza sahil

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