Upendra Bajpai

Upendra Bajpai

@upendrabajpai594

Upendra Bajpai shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Upendra Bajpai's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal

कई दिन से बहुत ख़ुश रह रहा हूँ
मुझे दुख देने वाले मर गए क्या

Upendra Bajpai

ख़ुदा जाने कहाँ पे खो गया वो
मेरे अपनों को मेरे साथ करके

अभी लौटा हूँ अपने बिस्तरा पर
तेरी यादों से दो-दो हाथ करके

Upendra Bajpai

वफ़ा के घर में जाकर पूछता हूँ
यहाँ इक शख़्स रहता था हमारा

Upendra Bajpai

मौत जब पास में खड़ी होगी
ज़िन्दगी ज़िन्दगी करेंगे आप

Upendra Bajpai

मैं क्या करूँ जो मौत से उम्मीद न रखूँ कोई
मैं क्या करूँ कि ज़िन्दगी में कुछ बदल नहीं रहा

वो हौसला था फूँक मारकर बुझा दें आफ़ताब
ये हाल है कि मुझसे इक चराग़ जल नहीं रहा

Upendra Bajpai

वो अपने साथ साथ में हम जैसे खिलौने
रखती है डेढ़ साल से ज़्यादा नहीं रखती

Upendra Bajpai

मैं आज भी उस इश्क़ की जागीर में ख़ुश हूँ
यानी मैं गुज़रे वक़्त की तस्वीर में ख़ुश हूँ

डर लग रहा था तेरी जुदाई से मुझको पर
सपने में ख़ुश नहीं था मैं ताबीर में ख़ुश हूँ

Upendra Bajpai

ख़ुशी पा लेने की उतनी न होगी
तुझे खोने का डर जितना बड़ा है

Upendra Bajpai

रात के वक़्त मुझे हुस्न-ए-उदासी न दिखा
रात के वक़्त मेरे ज़ख़्म जवाँ होते हैं

Upendra Bajpai

गर मैं देखूँ तो सारी दुनिया है
गर मैं सोचूँ तो कुछ नहीं अपना

Upendra Bajpai

उम्र आधी सुलग चुकी है तेरी
अब न पी बुझा दे ये सिगरेट

Upendra Bajpai

ऐसे आँखों को उसकी मत देखो
तैरना सीख लो मियाँ पहले

Upendra Bajpai

मुझको तितली बना दे या मौला
एक गुल पे है बैठना मौला

जल चुका हूँ मैं आख़िरी कश तक
मैं हूँ सिगरेट मुझे बुझा मौला

Upendra Bajpai

रश्क़ होता है चूमते हैं गाल
तेरे झुमके रक़ीब हैं मेरे

Upendra Bajpai

मुझे तनहाइयाँ जब हद से ज़ियादा तंग करती हैं
तुम्हारी याद की सिगरेट जलाकर बैठ जाता हूँ

Upendra Bajpai

गाँव का वो लड़का जो सबमें अव्वल था
सिगरेट पीते-पीते इक दिन मर जायेगा

Upendra Bajpai

सुकून देती थी तब मुझको वस्ल की सिगरेट
अब उसके हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं

Upendra Bajpai
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उसको कोई बताओ यहाँ ज़िन्दगी भी है
जो शख़्स ख़ुदकुशी की तरफ़ जा रहा है यार

Upendra Bajpai

बहुत मुश्किल है दर्द-ए-दिल सँभाला जा नहीं सकता
तुम्हारी याद का काँटा निकाला जा नहीं सकता

तुम्हें पाने की दिल में छटपटाहट है बहुत लेकिन
ख़ुदा ने जो लिखा क़िस्मत में टाला जा नहीं सकता

Upendra Bajpai

ये जो कहने को कई लोग हैं मेरे अपने
ये कई लोग तो ग़ैरों से भी वाबस्ता है

Upendra Bajpai

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