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इन आँखों ने मेरी जब से आप की आँखें देखी हैं
भूल गईं हैं मैख़ाने को कौन सा रस्ता जाएगा
भूल गईं हैं मैख़ाने को कौन सा रस्ता जाएगा
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लगने लगी हैं ऐसी मुझे प्यार की बातें
जैसी हैं मेरे देश की सरकार की बातें
जैसी हैं मेरे देश की सरकार की बातें
ऐ बिछड़े हुए यार तू आया है बहुत याद
जब जब कहीं पे छेड़ी गईं यार की बातें
हो जाऍं मुरीद आप भी ऐ हज़रत ए नासेह
जो छेड़ दूँ उन के लब ओ रुख़्सार की बातें
लेना ही नहीं था जो मुझे वो भी ख़रीदा
कुछ इस तरह प्यारी थीं दुकाँ दार की बातें
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सब रंज ओ ग़म भी गुम थे जब मिरे साथ तुम थे
वो दौर था हमारा कितना हँसी ख़ुशी का
वो दौर था हमारा कितना हँसी ख़ुशी का
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हमारे दिल को तिरी रूह से मोहब्बत है
हमारे इश्क़ में शामिल बदन की प्यास नहीं
यहाँ के लोग तो अब ख़ून पीने वाले हैं
यहाँ किसी को भी पानी की कोई प्यास नहीं
न जाने क्यूँ मुझे दिन-रात याद आता है
वो जिस का साया भी अब मेरे आस-पास नहीं
नसीब वाले हो जो तुम ने पा लिया उस को
ये इश्क़ सैफ मियाँ हर किसी को रास नहीं
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