ये दिल फिर टूटता है इत्तिफ़ाक़न
    मुझे तू फिर मिला है इत्तिफ़ाक़न

    क़सम तेरी मैं पत्थर बन चुका हूँ
    ये ऑंसू गिर रहा है इत्तिफ़ाक़न

    निगूँ रहता था जो पहलू में तेरे
    वो सर अब कट चुका है इत्तिफ़ाक़न

    जो आया बा'द तेरे उस का चेहरा
    तिरे चेहरे ही सा है इत्तिफ़ाक़न

    तुझे मुझ से भी बदतर मिल गया है
    ये मेरी बद-दुआ है इत्तिफ़ाक़न

    मुझे हर जानलेवा हादसे में
    तिरा चेहरा दिखा है इत्तिफ़ाक़न

    बिल-आख़िर आज उस खाई किनारे
    तिरा बेटा खड़ा है इत्तिफ़ाक़न

    पुराना था हवा से गिर पड़ा था
    नया पंखा लगा है इत्तिफ़ाक़न

    इमरजेंसी के ख़ाने में अभी तक
    तिरा नंबर लिखा है इत्तिफ़ाक़न

    था वा'दा तो न मुॅंह लगने का यूशा
    अचानक लब हिला है इत्तिफ़ाक़न
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    वो निडर बे-सिपर गया होगा
    या'नी अब तक वो मर गया होगा

    ज़हर जो अब उतर गया होगा
    वो कलेजा कुतर गया होगा

    जिस ने मेरा हर एक ज़ख़्म सिया
    मेरे ख़ूॅं में वो तर गया होगा

    कई तूफ़ान चीरने के बा'द
    वो परिंदा ठहर गया होगा

    होंठ से ख़ूॅं निकल ही जाता पर
    आज जी उस का भर गया होगा

    अम्र तो दो जहाॅं का बासी था
    दो जहाॅं में बिखर गया होगा
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    नाम पे तेरे मुझे मारा गया ये क्या ख़ुदा
    ये मिला मुझ को इबादत का सिला ये क्या ख़ुदा

    सम्त उस की आ रहे था तीर जो मैं खा गया
    आख़िरश मैं तेग़ से उस की मरा ये क्या ख़ुदा

    इक तरफ़ कुछ गर्म सा लगता है बिस्तर आज भी
    जो की सोता था उधर वो तो गया ये क्या ख़ुदा

    एक पल को इक हॅंसी सी छूटती है और फिर
    बस वहीं पर हो मैं जाता चुप खड़ा ये क्या ख़ुदा

    मैं उसे जकड़े हुए था और वो कहती गई
    कर रहीं हूँ वापसी सू-ए-ख़ुदा ये क्या ख़ुदा

    ख़ूॅं पसीने से ख़रीदी एक गाड़ी और उधर
    मेरे बचपन का वो झूला जल गया ये क्या ख़ुदा

    अब से पहले भी तो रसमन ये इबादत की गई
    आज कैसे ये मिरा ऑंसू बहा ये क्या ख़ुदा

    मैं सरापा प्यार था ख़ुशवार था हुश्यार था
    मैं अचानक शा'इरी करने लगा ये क्या ख़ुदा
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    अक्स जब तेरा मुझे उस
    में मिला तो हॅंस दिया मैं
    ग़ौर से देखा जो मैं ने आइना तो हॅंस दिया मैं

    तोहमतें सब झेलता था लैला मजनूॅं खेलता था
    एक पत्थर जब मेरे सर पे पड़ा तो हॅंस दिया मैं

    मौत मुझ तक आ रही थी नूर सा इक छा रहा था
    नूर के पीछे तिरा चेहरा दिखा तो हॅंस दिया मैं

    मेरी साॅंसों की रवानी आख़िरी मंज़िल पे पहुॅंची
    इंतिहा पे फिर मिली इक इब्तिदा तो हॅंस दिया मैं

    मैं खड़ा शमशान में ताज़ा यतीमी चख रहा था
    उस चिता में मैं जो लड़का सा दिखा तो हॅंस दिया में

    रात दिन सींचा जिसे था मैं ने अपने आँसुओं से
    है अजब वो जब हुआ मुझ से जुदा तो हॅंस दिया मैं

    हर तरफ़ अफ़सुरदगी थी हादसे थे बेकली थी
    जो न दूजा रास्ता कोई दिखा तो हॅंस दिया मैं

    हर सिपर को तोड़ता था मैं मुक़द्दर मोड़ता था
    वार से अपने ही मैं जब ख़ुद गिरा तो हॅंस दिया मैं

    मैं तो यूशा रो रहा था एक जमघट हॅंस रहा था
    हाॅं मगर जब वो भी मुझ पे हॅंस पड़ा तो हॅंस दिया मैं
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    बस बयाबाॅं थे और वहशत थी
    शायद अल्लाह को नदामत थी

    पहले आदम के और आदम बा'द
    न अभी है न आदमीयत थी

    अब ये जी दौड़ भाग माॅंगता है
    पहले पहले मुझे भी फ़ुर्सत थी

    आज जिस आसमाँ में तैरते हो
    कभी मेरी वहाँ भी शिरकत थी

    क्या कहोगी अगर कभी मैं कहूँ
    तुम से पहले भी इक मोहब्बत थी

    जब गिरे ही तो कर लिया सजदा
    कुछ इसी हाल में इबादत थी

    नहीं तुम में तो कोई नुक़्स न था
    मुझे ख़ुदस ही कुछ शिकायत थी

    आज चुप हो तो कल को चीख़ोगे
    कुछ न कहना मेरी भी आदत थी

    उस की रहमत कि तब मिला मुझ को
    जब ख़ुदा की बड़ी ज़रूरत थी

    बैठे जब ऐरोप्लेन में यूशा
    जेब में साइकिल की क़ीमत थी
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    बात अब हर किसी से करता हूँ
    मुझे डर है कि मैं अकेला हूँ

    आज कल वक़्त यूँॅं गुज़रता है
    ध्यान दे कर घड़ी को सुनता हूँ

    बात बिगड़ेगी साथ रहने से
    तुम अकेले हो और मैं तन्हा हूँ

    आज की रात है क़यामत की
    चाॅंद पूरा है और मैं आधा हूँ

    आप के अश्क कारोबार मिरा
    आप के मोतियों को चुनता हूँ

    ये हुनर अपनी माॅं से सीखा है
    दर्द लेता हूँ प्यार देता हूँ

    बात जो मुझ को मार डालेगी
    वही कहने को तो मैं ज़िंदा हूँ

    मैं अज़ल से हूँ डूबता सूरज
    शाम होने पे ही मैं दिखता हूँ

    कम से कम सामने मिरे रो लो
    मैं तो यूशा तुम्हारा अपना हूँ
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    दिल ने आख़िर ये बात मानी है
    ज़िन्दगी मौत की कहानी है

    आँख फाड़े रहो मगर इक दिन
    नींद आनी है जान जानी है

    मुझ को होता है ये गुमाँ अक्सर
    थोड़ी बूढ़ी मेरी जवानी है

    दिल में कुछ हौसले नए हैं पर
    अपनी हालत वही पुरानी है

    आँधियाँ छत उड़ा गई मेरी
    और बरसात भी अब आनी है

    अपने गिरते मकाँ को ग़ौर से देख
    अब भी जम्हूरियत बचानी है

    'अम्र' सीनाज़नी का ख़ूगर हूँ
    नग़्मा-ख़्वानी भी नौहा-ख़्वानी है
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    ख़ुद से बातें करता है
    मुझ
    में कोई मुझ सा है

    लोगों संग ही रहता हूँ
    ख़ुद से छुपना आता है

    इस बचकाने शाइ'र में
    इक संजीदा बच्चा है

    ग़ज़लें नाज़िल होती हैं
    कोई क्या ही कहता है

    फ़नकारों को उन का फ़न
    तोहफ़ा है या फंदा है

    ख़ुद को शाइ'र कहता है
    मुझ
    में भी इक 'यूशा' है
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    कोई दुख ऐसा खा गया मुझ को
    शे'र कहना भी आ गया मुझ को

    मैं बला की बुलंद इमारत था
    एक कंकड़ ही ढा गया मुझ को

    जब उसे मुझ से हो गई नफ़रत
    ठीक तब ही वो भा गया मुझ को

    पहली बाज़ी उसी ने खेली थी
    तो वही शख़्स पा गया मुझ को

    नज़्म कोई मुझे ही पढ़ बैठी
    कोई गीत 'अम्र' गा गया मुझ को
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    Yusha Abbas 'Amr'
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    शोख़ी-ए-गुल में था गॅंवाया होश
    एक काॅंटा चुभा तो आया होश

    हर सितम मेरे सामने ही हुआ
    मैं ने सब जान के दबाया होश

    मजनूॅं पागल न था सयाना था
    उस ने हर एक से छुपाया होश

    तुझ को देखा तो सारे होश उड़े
    जाने कैसे था फिर जताया होश

    मैं गिरा फिर खड़ा हुआ चीख़ा
    मैं था बेहोश पर दिखाया होश

    मैं ने दिन भर बुलंद रक्खी ख़ुदी
    मैं ने हर शाम है लुटाया होश

    बेख़ुदी थी बदन में ताब न थी
    उस से मिलने को पर जुटाया होश

    अम्र ख़ुद-रफ़्तगी में जीते थे
    इल्म से फ़िक्र से कमाया होश
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    Yusha Abbas 'Amr'
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