दिल ने आख़िर ये बात मानी है
ज़िन्दगी मौत की कहानी है
आँख फाड़े रहो मगर इक दिन
नींद आनी है जान जानी है
मुझ को होता है ये गुमाँ अक्सर
थोड़ी बूढ़ी मेरी जवानी है
दिल में कुछ हौसले नए हैं पर
अपनी हालत वही पुरानी है
आँधियाँ छत उड़ा गई मेरी
और बरसात भी अब आनी है
अपने गिरते मकाँ को ग़ौर से देख
अब भी जम्हूरियत बचानी है
'अम्र' सीनाज़नी का ख़ूगर हूँ
नग़्मा-ख़्वानी भी नौहा-ख़्वानी है
— Yusha Abbas 'Amr'















