ख़ुद से बातें करता है
मुझ
में कोई मुझ सा है
लोगों संग ही रहता हूँ
ख़ुद से छुपना आता है
इस बचकाने शाइ'र में
इक संजीदा बच्चा है
ग़ज़लें नाज़िल होती हैं
कोई क्या ही कहता है
फ़नकारों को उन का फ़न
तोहफ़ा है या फंदा है
ख़ुद को शाइ'र कहता है
मुझ
में भी इक 'यूशा' है
— Yusha Abbas 'Amr'















