बचा कुछ राब्ता है एहतियातन

ये हम में फ़ासला है एहतियातन

फ़क़त तनहाई से घबरा के उस ने
मुझे अपना कहा है एहतियातन

मैं उस का आख़िरी ख़त खोलता हूँ
मिरा दिल बैठता है एहतियातन

कोई ख़ुशहाल शोख़ अंदाज़ लड़का
मिरा चेहरा बना है एहतियातन

मुझे बर्बाद ये वहशत न कर दे
तुम्हें भेजा गया है एहतियातन

क़ज़ा के बा'द आँखें खुल गई तो
ख़ुदा मैं ने रखा है एहतियातन

हवाओं से ही बस्ती ढह चुकी थी
अब आया ज़लज़ला है एहतियातन

सियाही सूखना मनहूसियत है
क़लम यूँ भी उठा है एहतियातन

वही शजरा वही तिशनालबी है
ये मक़्तल तय शुदा है एहतियातन

— Yusha Abbas 'Amr'

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