पूछे जाने पे उस का रद अच्छा था
पर जल्लाद के ज़ेहन में सरमद अच्छा था
उधड़े पर टूटे नाख़ुन और ज़ख़्मी आँख
पिंजरे अंदर ही मैं शायद अच्छा था
अब बस मैं हूँ सूरज है और तारे हैं
हाॅं लेकिन अपना वो गुम्बद अच्छा था
एक में दसवाॅं हिस्सा मेरी हामी थी
ज़हर तुम्हारा नब्बे फ़ीसद अच्छा था
हिज्र तरक़्क़ी तक का रस्ता था या'नी
या'नी उस लड़की का मक़सद अच्छा था
इक झूठी मुस्कान को क़ाएम रखने में
तू अच्छा था पर मैं बेहद अच्छा था
बस यूशा में वो नूरानी ताब कहाॅं
नाम में मेरे शायद सय्यद अच्छा था
— Yusha Abbas 'Amr'















