Parvez Shaikh

Top 10 of Parvez Shaikh

    ज़िंदगी चल मिरा क़ुसूर बता
    हिज्र क्यों काटना पड़ा मुझ को
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    तंज़ जो मुझ पे कर रहा है तू अभी
    दाद देगा ज़रूर शे'र पे मिरे
    Parvez Shaikh
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    तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है
    मैंने इक राज़ को ही दिल में बसा रक्खा है

    आ ही जाता है तू हर बार मिरे ख़्वाबों में
    तेरी ही याद ने दीवाना बना रक्खा हैं
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    दिल में हैं वो जफ़ा पे नहीं
    इश्क़ मेरा हवा पे नहीं


    इतना मासूम है मेरा दिल

    बात करता वफ़ा पे नहीं
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    Parvez Shaikh
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    ज़ुल्म करते हैं हम पे लोग अभी
    इतना क्यों जलते हम से लोग अभी

    हमने तो हक़ किसी का खाया नहीं
    तंज़ कैसे भी देते लोग अभी
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    Parvez Shaikh
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    नौकरी भी चली ही गई है यू तो
    ज़िंदगी दर बदर की गई है यू तो

    कोई दुख को मिरे क्यों समझता नहीं
    तंज़ की बस सदा दी गई है यू तो
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    Parvez Shaikh
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    वो ज़ालिम ज़रा कुछ तो खौफ़-ए-ख़ुदा कर
    कि आ सकती हैं अब क़यामत कभी भी
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    तकब्बुर तू दौलत पे इतना भी मत कर
    चिपक सकती है तुझ से ग़ुर्बत कभी भी
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    मुहब्बत है क्यों पासदारी नहीं है
    जी में उसके ईमानदारी नहीं है
    Parvez Shaikh
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    मिरी आबरू का तमाशा किया है किसी ने
    सरे आम मुझको शनासा किया है किसी ने
    Parvez Shaikh
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