हिज्र-ए-मौसम में अपनी सी कर ली
तू ने हद पार सारी ही कर ली
तू ने हद पार सारी ही कर ली
दिल मिरा टूट ज़ोर से ही गया
बात जब उस ने ग़ैर की कर ली
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मुहब्बत है क्यूँ पासदारी नहीं है
जी में उस के ईमानदारी नहीं है
जी में उस के ईमानदारी नहीं है
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