बात अब हर किसी से करता हूँ
मुझे डर है कि मैं अकेला हूँ
आज कल वक़्त यूँॅं गुज़रता है
ध्यान दे कर घड़ी को सुनता हूँ
बात बिगड़ेगी साथ रहने से
तुम अकेले हो और मैं तन्हा हूँ
आज की रात है क़यामत की
चाॅंद पूरा है और मैं आधा हूँ
आप के अश्क कारोबार मिरा
आप के मोतियों को चुनता हूँ
ये हुनर अपनी माॅं से सीखा है
दर्द लेता हूँ प्यार देता हूँ
बात जो मुझ को मार डालेगी
वही कहने को तो मैं ज़िंदा हूँ
मैं अज़ल से हूँ डूबता सूरज
शाम होने पे ही मैं दिखता हूँ
कम से कम सामने मिरे रो लो
मैं तो यूशा तुम्हारा अपना हूँ
— Yusha Abbas 'Amr'















