मेरे ग़म को मिली दवा ही नहीं
मैं ने उस होंट को छुआ ही नहीं
कोशिशें उस ने कीं बहुत लेकिन
दिल मिरा टूट के जुड़ा ही नहीं
सब समझते थे बस मैं तेरा हूँ
तो कोई भी मिरा हुआ ही नहीं
ऐ ख़ुदा ऐसा दिन न दिखलाना
मुझे कहना पड़े ख़ुदा ही नहीं
मेरी ऑंखें बहीं तो बहती गईं
मैं उसे ग़म-ज़दा दिखा ही नहीं
मैं ने की फिर से ख़ुद-कुशी लेकिन
आइना ख़ाक में गड़ा ही नहीं
आशिक़ी फिर नई करो यूशा
शा'इरी में मज़ा बचा ही नहीं
— Yusha Abbas 'Amr'















