आसमाँ के ज़र्ब मेरा आसमाँ चिटका गए
एक कंकड़ तोड़ने को कितने कोहकन आ गए
आसमाँ की ओर मैं ने की हथेली ख़ौफ़ से
बर्क़ से जो ज़ख़्म उभरे नक़्श बनकर छा गए
एक साया ख़्वाब की ता'बीर में पाया गया
हम उसी साए से शायद डर गए थर्रा गए
हम बड़े मग़रूर थे हम को न थी जन्नत क़ुबूल
हम ने दोज़ख़ माँग ली ज़िंदा हुए दुनिया गए
एक दरिया ख़ूब गहरा भाप बन कर उड़ गया
हम वो हस्ती हैं जो अपनी बूॅंद से उकता गए
हम ने 'यूशा' काट देखी घर में भी और ख़ुद में भी
ख़ुद को अंदर नोच डाला ख़ुद को बाहर खा गए
— Yusha Abbas 'Amr'















